What Does the Bible Say About Criticism?
Key Scriptures and spiritual guidance on criticism
बाइबिल कई स्थानों पर आलोचना के विषय में व्यक्त करती है।... (3-4 पैराग्राफ)
Bible Verses About Criticism
Proverbs 15:31
“जो कोई सुनता है, वह जीवन के वचन को अपनाता है, और बुद्धिमान व्यक्ति को आलोचना की शिक्षा मिलती है।”
Proverbs 12:1
“जो आलोचना सुनता है, वह ज्ञानी हो जाता है, परन्तु जो कोई निन्दा सुनता है, वह अविवेकी होता है।”
Ephesians 4:29
“केवल उन वचनों का उपयोग किया करो जो दूसरों के लिए उपयुक्त हो, ताकि सुनने वालों को शान्ति मिले।”
Proverbs 27:5
“खुले संगी आलोचना करते हैं। वे चुप आलोचना करने में दोगुने होते हैं।”
Proverbs 15:32
“जो कोई आलोचना सुनता है और उसे ध्यान देता है, वह अपने आत्मा के लिए बुद्धिमान होता है।”
Matthew 7:1-2
“मत करो ताकि तुम्हें न आलोचना की जाए; क्योंकि जैसी आलोचना करोगे, वैसी ही आलोचना पाओगे।”
Colossians 3:13
“दूसरों को बरी करते रहो, और यदि किसी का कोई शिकायत हो, तो एक दूसरे के विरुद्ध शिकायत करने का अवसर रखो।”