What Does the Bible Say About Relationships?
Key Scriptures and spiritual guidance on relationships
बाइबल कई स्थानों पर संबंधों पर विचार करती है। संबंधों का महत्व और सहायकता के लिए यह संदेश देती है कि हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम, समझदारी और समर्पण से रहना चाहिए। साथी के प्रति समर्पित और समझदार होना, एक-दूसरे के भले की चिंता करना और परस्पर सहायता करना बाइबल के सिद्धांतों में महत्वपूर्ण है।
Bible Verses About Relationships
Ephesians 4:2
“सब गम्भीरता, विनम्रता, सहानुभूति और प्रेम से एक-दूसरे के साथ सहनशीलता करो।”
1 Corinthians 13:4-7
“प्रेम धीरज से है, प्रेम बन्धनों को मैत्री से बाँधता है, प्रेम क्रोध नहीं करता, प्रेम अन्याय का भला नहीं चाहता।”
Colossians 3:14
“और उसके अलावा प्रेम को बाँधे रहो, क्योंकि यह एकता के बाँधने का तत्व है।”
Proverbs 17:17
“एक सच्चा मित्र सदा द्वारा होता है, और आपात समय में भी भाई सहायता के लिए उत्तर देता है।”
1 Peter 4:8
“अंतिम में, सभी एक-दूसरे से गहरे प्रेम करो, क्योंकि प्रेम अपराधों को ढँक देता है।”
Ephesians 5:33
“पति को अपनी पत्नी से प्रेम करना चाहिए और पत्नी को अपने पति से सम्मान करना चाहिए।”
1 John 4:7
“प्रेम के माध्यम से हमें एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि प्रेम भगवान से उत्पन्न होता है।”