
एलिजाबेथ की कहानी
एलिज़ाबेथ एक महिला थी जो बाइबल के न्यू टेस्टामेंट में थी, जिन्हें जॉन द बैप्टिस्ट की माँ के रूप में जाना जाता है। वह यीशु की माँ मेरी की रिश्तेदार थीं, और दोनों महिलाएं एक ही समय में गर्भवती थीं। एलिज़ाबेथ को एक धार्मिक और साधक स्त्री माना गया था और उसकी बूढ़ापे में एक बच्चा सरपरस्त हुआ था। लूक के इंजील के अनुसार, एलिज़ाबेथ ईस्राइल के पहले उच्च पुरोहित एहरोन के वंशज थीं, और उसका पति जाकरियास था, जो मंदिर में पुरोहित थे। जब एन्जल गैब्रिएल मेरी के पास जाकर यीशु को जन्म देने की सूचना देने के लिए आए, तो वह जखारियास के पास भी गए थे ताकि जॉन द बैप्टिस्ट के जन्म की सूचना दे सकें। जब जॉन का जन्म हुआ, तो एलिज़ाबेथ और जखारियास ने उनके आगमन के लिए भगवान की प्रशंसा की और एलिज़ाबेथ की रिश्तेदार, मेरी, ने अपने और उसके शिशु की देखभाल के लिए उसकी सहायता के लिए उन्हें प्यार किया। एलिज़ाबेथ ने यीशु के जन्म की कथा में एक नाटकीय भूमिका निभाई, लेकिन उसका ईश्वर की शक्ति और उसके वादों के प्रति भरोसे का साक्षात्कार महत्वपूर्ण था।
नाम का अर्थ
एलिजबेथ का नाम हिब्रू मूल से है, जो हिब्रू नाम Elisheba (אֱלִישֶׁבַע) से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है "भगवान मेरा प्राण है" या "भगवान समृद्धि है"।
नाम की उत्पत्ति
हिब्रू
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