उपद्रवि (Upadravi) 39:37
“सारे सामान सहित दीवट, और उसकी सजावट के दीपक और उजियाला देने के लिये तेल;”
संदर्भ: उपद्रवि (Upadravi) 39
35डंडों सहित साक्षीपत्र का सन्दूक, और प्रायश्चित का ढकना;
36सारे सामान समेत मेज, और भेंट की रोटी;
37सारे सामान सहित दीवट, और उसकी सजावट के दीपक और उजियाला देने के लिये तेल;
38सोने की वेदी, और अभिषेक का तेल, और सुगन्धित धूप, और तम्बू के द्वार का परदा;
39पीतल की झंझरी, डंडों और सारे सामान समेत पीतल की वेदी; और पाए समेत हौदी;
उपद्रवि (Upadravi) 39 के बारे में: यजमान के वस्त्र

पुरोहितों के वस्त्र और अंगस्नान का तेल बनाया जाता है।
व्याख्या
प्रारंभी अधयाय 39 एग्जोडस की पुस्तक का अंतिम अध्याय है और इसमें तेन्तुकुटी और पुजारियों के वस्त्रों का पूरा होने का वर्णन है। अध्याय उस समय शुरू होता है जब पुजारियों के वस्त्र बनाए गए थे, जो मुलायम लिनन और स्वर्ण, नीला, जामुनी और भगवा धागों से बने थे। वस्त्रों में एफोड, स्त्री रत्न, रोब, जुब्बा, पगड़ी और कमरबंद शामिल थे। उसके बाद अध्याय में तेन्तुकुटी का निर्माण का वर्णन किया गया, जो खजूर के पेड़ से बनी और स्वर्ण से ढकी हुई थी। तेन्तुकुटी को दो भागों में बांटा गया था, पवित्र स्थान और सबसे पवित्र स्थान। अध्याय तेन्तुकुटी और पुजारियों के वस्त्रों का पूरा होने का वर्णन के साथ समाप्त होता है।
यह अध्याय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तेन्तुकुटी और पुजारियों के वस्त्रों का पूरा होना चिह्नित होता है, जो भगवान की पूजा के लिए आवश्यक थे। तेन्तुकुटी इस्राएलियों के बीच भगवान की उपस्थिति का भौतिक प्रतिनिधित्व था और पुजारियों के वस्त्र उनके भगवान को समर्पित होने का संकेत था। यह अध्याय भी भगवान के आज्ञानुसार कृतकार्य की महत्वपूर्णता का अभिप्राय करता है। इस्राएलियों को यह हुक्म था कि वे भगवान के निर्देशों के अनुसार तेन्तुकुटी और पुजारियों के वस्त्र निर्माण करें और उन्होंने ऐसा विश्वासपूर्वक किया। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि हम जब भगवान की आज्ञाओं का पालन करते हैं, उसका आशीर्वाद हमें मिलेगा और हमारे लिए संबल प्रदान करेगा।