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यहेजकेल 11
यहेजकेल 11

यहेजकेल 11

भगवान का वादा नवीन स्थापना का

इज़कीएल 11 में, भगवान ने एज़ीकीएल को जानकारी दी कि यरूशलम में दुष्ट वृद्ध दंडित और निर्वासित होंगे, परंतु ईमानदार लोगों का एक शेष भाग भूमि में पुनर्स्थापित किया जाएगा। जब ईश्वर की महिमा शहर से दूर होती है, तो एज़ीकीएल को महिमानुभव करते हुए मूंगे के पहाड़ पर भगवान की उपस्थिति देखने की अनुमति दी जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसके लोगों के साथ उसकी निर्वासन के दौरान भी उनके साथ उसकी उपस्थिति जारी रहेगी।
1 तब आत्मा ने मुझे उठाकर यहोवा के भवन के पूर्वी फाटक के पास जिसका मुँह पूर्वी दिशा की ओर है, पहुँचा दिया; और वहाँ मैंने क्या देखा, कि फाटक ही में पच्चीस पुरुष हैं। और मैंने उनके बीच अज्जूर के पुत्र याजन्याह को और बनायाह के पुत्र पलत्याह को देखा, जो प्रजा के प्रधान थे।
2तब उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, जो मनुष्य इस नगर में अनर्थ कल्पना और बुरी युक्ति करते हैं वे ये ही हैं।
3ये कहते हैं, 'घर बनाने का समय निकट नहीं, यह नगर हँडा और हम उसमें का माँस है।'
4इसलिए हे मनुष्य के सन्तान, इनके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर, भविष्यद्वाणी।”
5तब यहोवा का आत्मा मुझ पर उतरा, और मुझसे कहा, “ऐसा कह, यहोवा यह कहता है: हे इस्राएल के घराने तुमने ऐसा ही कहा है; जो कुछ तुम्हारे मन में आता है, उसे मैं जानता हूँ।
6तुमने तो इस नगर में बहुतों को मार डाला वरन् उसकी सड़कों को शवों से भर दिया है।
7इस कारण प्रभु यहोवा यह कहता है: जो मनुष्य तुमने इसमें मार डाले हैं, उनके शव ही इस नगररूपी हँडे में का माँस है; और तुम इसके बीच से निकाले जाओगे।
8तुम तलवार से डरते हो, और मैं तुम पर तलवार चलाऊँगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
9मैं तुमको इसमें से निकालकर परदेशियों के हाथ में कर दूँगा, और तुमको दण्ड दिलाऊँगा।
10तुम तलवार से मरकर गिरोगे, और मैं तुम्हारा मुकद्दमा, इस्राएल के देश की सीमा पर चुकाऊँगा; तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।
11यह नगर तुम्हारे लिये हँडा न बनेगा, और न तुम इसमें का माँस होंगे; मैं तुम्हारा मुकद्दमा इस्राएल के देश की सीमा पर चुकाऊँगा।
12तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ; तुम तो मेरी विधियों पर नहीं चले, और मेरे नियमों को तुमने नहीं माना; परन्तु अपने चारों ओर की अन्यजातियों की रीतियों पर चले हो।”
13मैं इस प्रकार की भविष्यद्वाणी कर रहा था, कि बनायाह का पुत्र पलत्याह मर गया। तब मैं मुँह के बल गिरकर ऊँचे शब्द से चिल्ला उठा, और कहा, “हाय प्रभु यहोवा, क्या तू इस्राएल के बचे हुओं को सत्यानाश कर डालेगा?”
14 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा,
15“हे मनुष्य के सन्तान, यरूशलेम के निवासियों ने तेरे निकट भाइयों से वरन् इस्राएल के सारे घराने से भी कहा है कि 'तुम यहोवा के पास से दूर हो जाओ; यह देश हमारे ही अधिकार में दिया गया है।'
16परन्तु तू उनसे कह, 'प्रभु यहोवा यह कहता है कि मैंने तुमको दूर-दूर की जातियों में बसाया और देश-देश में तितर-बितर कर दिया तो है, तो भी जिन देशों में तुम आए हुए हो, उनमें मैं स्वयं तुम्हारे लिये थोड़े दिन तक पवित्रस्‍थान ठहरूँगा।'
17इसलिए, उनसे कह, 'प्रभु यहोवा यह कहता है, कि मैं तुमको जाति-जाति के लोगों के बीच से बटोरूँगा, और जिन देशों में तुम तितर-बितर किए गए हो, उनमें से तुमको इकट्ठा करूँगा, और तुम्हें इस्राएल की भूमि दूँगा।'
18और वे वहाँ पहुँचकर उस देश की सब घृणित मूर्तियाँ और सब घृणित काम भी उसमें से दूर करेंगे।
19और मैं उनका हृदय एक कर दूँगा; और उनके भीतर नई आत्मा उत्‍पन्‍न करूँगा, और उनकी देह में से पत्थर का सा हृदय निकालकर उन्हें माँस का हृदय दूँगा,
20जिससे वे मेरी विधियों पर नित चला करें और मेरे नियमों को मानें; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्‍वर ठहरूँगा।
21परन्तु वे लोग जो अपनी घृणित मूर्तियाँ और घृणित कामों में मन लगाकर चलते रहते हैं, उनको मैं ऐसा करूँगा कि उनकी चाल उन्हीं के सिर पर पड़ेंगी, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”
22 इस पर करूबों ने अपने पंख उठाए, और पहिये उनके संग-संग चले; और इस्राएल के परमेश्‍वर का तेज उनके ऊपर था।
23तब यहोवा का तेज नगर के बीच में से उठकर उस पर्वत पर ठहर गया जो नगर की पूर्व ओर है।
24फिर आत्मा ने मुझे उठाया, और परमेश्‍वर के आत्मा की शक्ति से दर्शन में मुझे कसदियों के देश में बन्दियों के पास पहुँचा दिया। और जो दर्शन मैंने पाया था वह लोप हो गया।
25तब जितनी बातें यहोवा ने मुझे दिखाई थीं, वे मैंने बन्दियों को बता दीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न