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यशायाह 8
यशायाह 8

यशायाह 8

भगवान की योजना में विश्वास।

ईसाया अध्याय 8 के बारे में सारांश: ईसा ने परमेश्वर के आदेश पर एक बड़ी परची पर "महेरशलालहशबाज" शब्द लिखने के बारे में ईसाया को निर्देशित किया, जिसका मतलब है "जल्दी लूटने वाला, तेजी से क्षय". यह अस्यरिया द्वारा होने वाली घुसपैठ की आगाही के रूप में काम करता है। ईसाया भी लोगों को परमेश्वर की योजना पर भरोसा करने की प्रोत्साहित करता है और इसे याद दिलाता है कि दूसरों की भय के लिए ना डरें। उसने उन्हें याद दिलाया कि परमेश्वर उनका आश्रय है और उन्हें उसी पर ध्यान केंद्रित रखने की सलाह दी।
1 फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “एक बड़ी पटिया लेकर उस पर साधारण अक्षरों से यह लिख: महेर्शालाल्हाशबज के लिये।”
2और मैं विश्वासयोग्य पुरुषों को अर्थात् ऊरिय्याह याजक और जेबेरेक्याह के पुत्र जकर्याह को इस बात की साक्षी करूँगा।
3मैं अपनी पत्‍नी के पास गया, और वह गर्भवती हुई और उसके पुत्र उत्‍पन्‍न हुआ। तब यहोवा ने मुझसे कहा, “उसका नाम महेर्शालाल्हाशबज रख;
4क्योंकि इससे पहले कि वह लड़का बापू और माँ पुकारना जाने, दमिश्क और शोमरोन दोनों की धन-सम्पत्ति लूटकर अश्शूर का राजा अपने देश को भेजेगा।” विकल्‍प परमेश्‍वर या अश्शूरी
5यहोवा ने फिर मुझसे दूसरी बार कहा,
6“इसलिए कि लोग शीलोह के धीरे-धीरे बहनेवाले सोते को निकम्मा जानते हैं,
7इस कारण सुन, प्रभु उन पर उस प्रबल और गहरे महानद को,
8और वह यहूदा पर भी चढ़ आएगा, और बढ़ते-बढ़ते उस पर चढ़ेगा और गले तक पहुँचेगा;
9हे लोगों, हल्ला करो तो करो, परन्तु तुम्हारा सत्यानाश हो जाएगा।
10तुम युक्ति करो तो करो, परन्तु वह निष्फल हो जाएगी, तुम कुछ भी कहो, परन्तु तुम्हारा कहा हुआ ठहरेगा नहीं, क्योंकि परमेश्‍वर हमारे संग है।
11 क्योंकि यहोवा दृढ़ता के साथ मुझसे बोला और इन लोगों की-सी चाल-चलने को मुझे मना किया,
12और कहा, “जिस बात को यह लोग राजद्रोह कहें, उसको तुम राजद्रोह न कहना, और जिस बात से वे डरते हैं उससे तुम न डरना और न भय खाना।
13सेनाओं के यहोवा ही को पवित्र जानना; उसी का डर मानना, और उसी का भय रखना।
14और वह शरणस्थान होगा, परन्तु इस्राएल के दोनों घरानों के लिये ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान, और यरूशलेम के निवासियों के लिये फंदा और जाल होगा।
15और बहुत से लोग ठोकर खाएँगे; वे गिरेंगे और चकनाचूर होंगे; वे फंदे में फसेंगे और पकड़े जाएँगे।”
16 चितौनी का पत्र बन्द कर दो, मेरे चेलों के बीच शिक्षा पर छाप लगा दो।
17मैं उस यहोवा की बाट जोहता रहूँगा जो अपने मुख को याकूब के घराने से छिपाये है, और मैं उसी पर आशा लगाए रहूँगा।
18देख, मैं और जो लड़के यहोवा ने मुझे सौंपे हैं, उसी सेनाओं के यहोवा की ओर से जो सिय्योन पर्वत पर निवास किए रहता है इस्राएलियों के लिये चिन्ह और चमत्कार हैं।
19जब लोग तुम से कहें, “ओझाओं और टोन्हों के पास जाकर पूछो जो गुनगुनाते और फुसफुसाते हैं,” तब तुम यह कहना, “क्या प्रजा को अपने परमेश्‍वर ही के पास जाकर न पूछना चाहिये? क्या जीवितों के लिये मुर्दों से पूछना चाहिये?”
20व्यवस्था और चितौनी ही की चर्चा किया करो! यदि वे लोग इस वचनों के अनुसार न बोलें तो निश्चय उनके लिये पौ न फटेगी संकट का समय
21वे इस देश में क्लेशित और भूखे फिरते रहेंगे; और जब वे भूखे होंगे, तब वे क्रोध में आकर अपने राजा और अपने परमेश्‍वर को श्राप देंगे, और अपना मुख ऊपर आकाश की ओर उठाएँगे;
22तब वे पृथ्वी की ओर दृष्टि करेंगे परन्तु उन्हें सकेती और अंधियारा अर्थात् संकट भरा अंधकार ही देख पड़ेगा; और वे घोर अंधकार में ढकेल दिए जाएँगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न