आयुब 37

एलिहू बोलता है

एलीहू बोलते हैं, जॉब के दोस्तों की आलोचना करते हुए और यह दावा करते हुए कि भगवान न्यायशील और बुद्धिमान हैं।

एआई चित्रण: आयुब 37
आयुब 37
1“फिर इस बात पर भी मेरा हृदय काँपता है,
2उसके बोलने का शब्द तो सुनो,
3वह उसको सारे आकाश के तले,
4उसके पीछे गरजने का शब्द होता है;
5परमेश्‍वर गरजकर अपना शब्द अद्भुत रीति से सुनाता है,
6वह तो हिम से कहता है, पृथ्वी पर गिर,
7वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है,
8तब वन पशु गुफाओं में घुस जाते,
9दक्षिण दिशा से बवण्डर
10परमेश्‍वर की श्‍वास की फूँक से बर्फ पड़ता है,
11फिर वह घटाओं को भाप से लादता,
12वे उसकी बुद्धि की युक्ति से इधर-उधर फिराए जाते हैं,
13चाहे ताड़ना देने के लिये, चाहे अपनी पृथ्वी की भलाई के लिये
14“हे अय्यूब! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह,
15क्या तू जानता है, कि परमेश्‍वर क्यों अपने बादलों को आज्ञा देता,
16क्या तू घटाओं का तौलना,
17जब पृथ्वी पर दक्षिणी हवा ही के कारण से सन्‍नाटा रहता है
18फिर क्या तू उसके साथ आकाशमण्डल को तान सकता है,
19तू हमें यह सिखा कि उससे क्या कहना चाहिये?
20क्या उसको बताया जाए कि मैं बोलना चाहता हूँ?
21“अभी तो आकाशमण्डल में का बड़ा प्रकाश देखा नहीं जाता
22उत्तर दिशा से सुनहरी ज्योति आती है
23सर्वशक्तिमान जो अति सामर्थी है,
24इसी कारण सज्जन उसका भय मानते हैं,

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