मार्क ग्रंथ 8:3

“यदि मैं उन्हें भूखा घर भेज दूँ, तो मार्ग में थककर रह जाएँगे; क्योंकि इनमें से कोई-कोई दूर से आए हैं।””
— मार्क ग्रंथ 8:3 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: मार्क ग्रंथ 8

1उन दिनों में, जब फिर बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई, और उनके पास कुछ खाने को न था, तो उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उनसे कहा,

2“मुझे इस भीड़ पर तरस आता है, क्योंकि यह तीन दिन से बराबर मेरे साथ हैं, और उनके पास कुछ भी खाने को नहीं।

3यदि मैं उन्हें भूखा घर भेज दूँ, तो मार्ग में थककर रह जाएँगे; क्योंकि इनमें से कोई-कोई दूर से आए हैं।”

4उसके चेलों ने उसको उत्तर दिया, “यहाँ जंगल में इतनी रोटी कोई कहाँ से लाए कि ये तृप्त हों?”

5उसने उनसे पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्होंने कहा, “सात।”

मार्क ग्रंथ 8 के बारे में: पीटर की सार्वजनिक घोषणा, यीशु मौत की भविष्यवाणी।

मार्क ग्रंथ 8: पीटर की सार्वजनिक घोषणा, यीशु मौत की भविष्यवाणी।

यीशु चार हज़ार लोगों को भोजन प्रदान करते हैं और फरीसियों के खमीर के बारे में सिखाते हैं।

व्याख्या

मार्क 8 मार्क के सुसमाचार का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, क्योंकि यह यीशु की यरूशलम की यात्रा और उसकी अंतिम मौत की शुरुआत दर्शाता है। इस अध्याय में, यीशु अपने शिष्यों को अपनी पहचान और मिशन की सच्चाई का पता लगाना शुरू करते हैं। उन्होंने चार हजार लोगों का अद्भुत भोजन किया, और फिर अपने शिष्यों को फरीसियों और हेरोड की खमीर से चेतावनी देते हैं।

फिर यीशु अपने शिष्यों को सीसारिया फिलिप्पी क्षेत्र ले जाते हैं, जहां वे उनसे पूछते हैं कि लोग उसे कौन समझते हैं। जवाब देने के बाद, यीशु फिर उनसे पूछते हैं वे कौन समझते हैं कि वह कौन हैं। पीटर उत्तर देते हैं कि यीशु मसीह हैं, और फिर यीशु उन्हें इसका मतलब समझाने लगते हैं कि शिष्यता की कीमत क्या है। उन्होंने कहा कि उन्हें पीड़ा सहनी पड़ेगी, अस्वीकरण किया जायेगा, और मारा जायेगा, और फिर फिर जी उठेगा।

मार्क ग्रंथ 8 में लोग