गिनती 29:23

““फिर चौथे दिन दस बछड़े, और दो मेढ़े, और एक-एक वर्ष के चौदह निर्दोष भेड़ के नर बच्चे चढ़ाना;”
— गिनती 29:23 (Eliot Indian Bible)

इस पद को साझा करें

संदर्भ: गिनती 29

21और बछड़ों, और मेढ़ों, और भेड़ के बच्चों के साथ उनके अन्नबलि और अर्घ, उनकी गिनती के अनुसार, और नियम के अनुसार चढ़ाना।

22और पापबलि के लिये एक बकरा भी चढ़ाना; ये नित्य होमबलि और उसके अन्नबलि और अर्घ के अलावा चढ़ाए जाएँ।

23“फिर चौथे दिन दस बछड़े, और दो मेढ़े, और एक-एक वर्ष के चौदह निर्दोष भेड़ के नर बच्चे चढ़ाना;

24बछड़ों, और मेढ़ों, और भेड़ के बच्चों के साथ उनके अन्नबलि और अर्घ, उनकी गिनती के अनुसार, और नियम के अनुसार चढ़ाना।

25और पापबलि के लिये एक बकरा भी चढ़ाना; ये नित्य होमबलि और उसके अन्नबलि और अर्घ के अलावा चढ़ाए जाएँ।

गिनती 29 के बारे में: प्रभु के त्योहार

गिनती 29: प्रभु के त्योहार

भगवान इस्राएलीयों को आज्ञा देते हैं कि कुछ निश्चित महोत्सवों पर विशेष अर्पण और शांति अर्पण करें।

व्याख्या

गिनती 29 में, प्रभु मूसा को मित्रता देते हैं कि वह इस्राएलियों को वर्ष के सातवें महीने में प्रभु को बलियान चढ़ाने के लिए निर्देशित करें। प्रभु आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को एक जला हुआ बलिन चढ़ाना है, एक अन्नदान, एक पापयाजी अर्पण और एक दोषयाजी अर्पण। जला हुआ बलिन पहले दिन में चढ़ाया जाना है, और अन्नदान दूसरे दिन में चढ़ाया जाना है। पापयाजी और दोषयाजी नवावें दिन को चढ़ाया जाना है। प्रभु भी आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को महीने के पंद्रहवें दिन को एक जला हुआ बलिन चढ़ाना है, एक अन्नदान, एक पापयाजी अर्पण और एक दोषयाजी अर्पण। प्रभु भी आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को महीने के तेइस दिन को एक जला हुआ बलिन चढ़ाना है, एक अन्नदान, एक पापयाजी अर्पण और एक दोषयाजी अर्पण।

यह अध्याय इस बात की याद दिलाता है कि प्रभु को बलियान चढ़ाने का महत्व। प्रभु आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को महीने के निश्चित दिनों पर बलियान चढ़ाने हैं, और ये बलियान अधूर्णता और भगवान के प्रति श्रद्धा के एक प्रतीक के रूप में चढ़ाए जाने हैं। प्रभु भी आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को महीने के पंद्रहवें और तेइस दिन को एक बलियान चढ़ाने हैं, जो महीने के विशेष दिन हैं। यह एक याद दिलाता है कि प्रभु को विशेष दिनों पर सम्मान किया और भक्ति दी जानी चाहिए, साथ ही सामान्य दिनों पर भी। यह अध्याय भी प्रभु के आज्ञानुसार अनुसरण करने के महत्व की याद दिलाता है। प्रभु आज्ञा देते हैं कि इस्राएलियों को महीने के निश्चित दिनों पर बलियान चढ़ाने हैं, और ये बलियान अधूर्णता के साक्षात्कार के रुप में चढ़ाए जाने हैं।

गिनती 29 में लोग