नीतिवचन 15
नीतिवचन 15

नीतिवचन 15

शब्दों की शक्ति

प्रार्थनाएं का अनुचित उपयोग के प्रति चर्चा करते हुए, कहो की शक्ति की प्रोवर्ब की 15 वां अध्याय हमें इस बात के बारे में प्रेरित करता है कि शब्दों की ताकत और यह कैसे हमारी जिंदगी को आकार दे सकते है। यह हमें समझदारी और विचारपूर्वक बोलने के लिए प्रोत्साहित करता है, क्योंकि हमारे शब्द जीवन और आनंद और मृत्यु और विनाश ला सकते हैं। यह अध्याय भी बुद्धि की प्राप्ति, सुधार के लिए खुले रहने की महत्वता और प्रभु की आशीर्वादों पर बात करता है।
1कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है,
2बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं,
3यहोवा की आँखें सब स्थानों में लगी रहती हैं,
4शान्ति देनेवाली बात जीवन-वृक्ष है,
5मूर्ख अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है,
6धर्मी के घर में बहुत धन रहता है,
7बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं,
8दुष्ट लोगों के बलिदान से यहोवा घृणा करता है,
9दुष्ट के चालचलन से यहोवा को घृणा आती है,
10जो मार्ग को छोड़ देता, उसको बड़ी ताड़ना मिलती है,
11जब कि अधोलोक और विनाशलोक यहोवा के सामने खुले रहते हैं,
12ठट्ठा करनेवाला डाँटे जाने से प्रसन्‍न नहीं होता,
13मन आनन्दित होने से मुख पर भी प्रसन्नता छा जाती है,
14समझनेवाले का मन ज्ञान की खोज में रहता है,
15दुःखियारे के सब दिन दुःख भरे रहते हैं,
16घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से,
17प्रेमवाले घर में सागपात का भोजन,
18क्रोधी पुरुष झगड़ा मचाता है,
19आलसी का मार्ग काँटों से रुन्धा हुआ होता है,
20बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है,
21निर्बुद्धि को मूर्खता से आनन्द होता है,
22बिना सम्मति की कल्पनाएँ निष्फल होती हैं,
23सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है,
24विवेकी के लिये जीवन का मार्ग ऊपर की ओर जाता है,
25यहोवा अहंकारियों के घर को ढा देता है,
26बुरी कल्पनाएँ यहोवा को घिनौनी लगती हैं,
27लालची अपने घराने को दुःख देता है,
28धर्मी मन में सोचता है कि क्या उत्तर दूँ,
29यहोवा दुष्टों से दूर रहता है,
30आँखों की चमक से मन को आनन्द होता है,
31जो जीवनदायी डाँट कान लगाकर सुनता है,
32जो शिक्षा को अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है,
33यहोवा के भय मानने से बुद्धि की शिक्षा प्राप्त होती है,
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