BiblePics
होम
बाइबल की पुस्तकें
नीतिवचन
16
नीतिवचन 16
नीतिवचन 16
प्रभु में ज्ञान और समझ.
प्रसंग 16 में सुविचार भगवान से ज्ञान और समझ की महत्वता पर जोर देता है जीवन के सभी पहलुओं में। यह अहंकार और अभिमान के नुकसानदायक परिणामों से चेतावनी देता है, और एक विनम्र और धार्मिक ह्रदय की प्रोत्साहना करता है।
अध्याय पढ़ें
Book
उत्पत्ति
उपद्रवि (Upadravi)
लैवीयतन्
गिनती
द्वितीय विधान
यहोशुआ
न्यायियों
रूथ
1 समुएल
2 समुएल
१ राजाओं
2 राजाओं की किताब
१ इतिहास-गाथा
2 इतिहास
एज्रा
नहेमायाः
एस्तेर्र
आयुब
भजन - Bhajan
नीतिवचन
अभिज्ञानशास्त्र
श्रृंगार गीत (Shringar Geet)
यशायाह
यर्मियाह
विलापग्रंथ
यहेजकेल
दानिय्याल
होशेया
योएल
आमोस
ओवद्याह
योना
मीका
नहूम
हबक्कूक
दस्तीरे जफनिया
हाग्गाई
ज़खरिया (Zechariah)
मलाकी
मत्ती की बाइबिल
मार्क ग्रंथ
लूका
यूहन्ना
प्रेरितों के कामों का अनुसार (Preriton Ke Kamo Ka Anusar)
रोमियों किताब
1 कुरिन्थीयों
2 कुरिन्थियों
गलातियों से पत्रिका
एफिसीयों का पत्रिका
फिलिप्पियों
कुलुस्सीयों
१ थिस्सलोनिकियों का पहला पत्रिका
2 थिस्सलोनिकीयों
1 तीमुथियुस
2 तीमुथियुस
तीतुस
फिलेमोन
यहूदियों के लिए पुस्तक
याकूब
1 पतरसीya वाचन
2 पतरस
१ यूहन्ना
2 यूहन्ना
३ यूहन्ना
यहूदा
प्रकटिकरण
संस्करण
Eliot Indian Bible
1
मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है,
2
मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है,
3
अपने कामों को यहोवा पर डाल दे,
4
यहोवा ने सब वस्तुएँ विशेष उद्देश्य के लिये बनाई हैं,
5
सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है;
6
अधर्म का प्रायश्चित कृपा, और सच्चाई से होता है,
7
जब किसी का चालचलन यहोवा को भावता है,
8
अन्याय के बड़े लाभ से,
9
मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है,
10
राजा के मुँह से दैवीवाणी निकलती है,
11
सच्चा तराजू और पलड़े यहोवा की ओर से होते हैं,
12
दुष्टता करना राजाओं के लिये घृणित काम है,
13
धर्म की बात बोलनेवालों से राजा प्रसन्न होता है,
14
राजा का क्रोध मृत्यु के दूत के समान है,
15
राजा के मुख की चमक में जीवन रहता है,
16
बुद्धि की प्राप्ति शुद्ध सोने से क्या ही उत्तम है!
17
बुराई से हटना धर्मियों के लिये उत्तम मार्ग है,
18
विनाश से पहले गर्व,
19
घमण्डियों के संग लूट बाँट लने से,
20
जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है,
21
जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझवाला कहलाता है,
22
जिसमें बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का स्रोत है,
23
बुद्धिमान का मन उसके मुँह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है,
24
मनभावने वचन मधुभरे छत्ते के समान प्राणों को मीठे लगते,
25
ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा जान पड़ता है,
26
परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है,
27
अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है,
28
टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है,
29
उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसलाकर कुमार्ग पर चलाता है।
30
आँख मूँदनेवाला छल की कल्पनाएँ करता है,
31
पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं;
32
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से,
33
चिट्ठी डाली जाती तो है,
नीतिवचन 15
नीतिवचन 17
पाठ सेटिंग्स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न
नीतिवचन में कितने अध्याय हैं?