2उसने भोज के लिए अपने पशु काटे, अपने दाखमधु में मसाला मिलाया
3उसने अपनी सेविकाओं को आमंत्रित करने भेजा है;
4“जो कोई भोला है वह मुड़कर यहीं आए!”
7जो ठट्ठा करनेवाले को शिक्षा देता है, अपमानित होता है,
8ठट्ठा करनेवाले को न डाँट, ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे,
9बुद्धिमान को शिक्षा दे, वह अधिक बुद्धिमान होगा;
10यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है,
11मेरे द्वारा तो तेरी आयु बढ़ेगी,
12यदि तू बुद्धिमान है, तो बुद्धि का फल तू ही भोगेगा;
13मूर्खता बक-बक करनेवाली स्त्री के समान है; वह तो निर्बुद्धि है,
14वह अपने घर के द्वार में,
15वह उन लोगों को जो अपने मार्गों पर सीधे-सीधे चलते हैं यह कहकर पुकारती है,
16“जो कोई भोला है, वह मुड़कर यहीं आए;”
17“चोरी का पानी मीठा होता है,
18और वह नहीं जानता है, कि वहाँ मरे हुए पड़े हैं,