प्रसंग 105 में सामर्थ्य पुराण की याद दिलाई गई है। प्रसंगकार अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ ईश्वर के वाचन की कहानियाँ दोहरा रहे हैं, और यह कैसे ईश्वर ने इस्राएलियों को मिस्र में और पावित्र भूमि तक के यात्रा के दौरान संरक्षण और प्रारब्ध किया। प्रसंगकार पाठकों को सभी वहां किए गए कार्यों के लिए भगवान का धन्यवाद देने और स्तुति करने की प्रोत्साहना करते हैं।
1यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो,
2उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ,
3उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो;
4यहोवा और उसकी सामर्थ्य को खोजो,
5उसके किए हुए आश्चर्यकर्मों को स्मरण करो,
6हे उसके दास अब्राहम के वंश,
7वही हमारा परमेश्वर यहोवा है;
8वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है,
9वही वाचा जो उसने अब्राहम के साथ बाँधी,
10और उसी को उसने याकूब के लिये विधि करके,
11“मैं कनान देश को तुझी को दूँगा, वह बाँट में तुम्हारा निज भाग होगा।”
12उस समय तो वे गिनती में थोड़े थे, वरन् बहुत ही थोड़े,
13वे एक जाति से दूसरी जाति में,
14परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अत्याचार करने न दिया;
15“मेरे अभिषिक्तों को मत छुओं,
16फिर उसने उस देश में अकाल भेजा,
17उसने यूसुफ नामक एक पुरुष को उनसे पहले भेजा था,
18लोगों ने उसके पैरों में बेड़ियाँ डालकर उसे दुःख दिया;
19जब तक कि उसकी बात पूरी न हुई
20तब राजा ने दूत भेजकर उसे निकलवा लिया,
21उसने उसको अपने भवन का प्रधान
22कि वह उसके हाकिमों को अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित करे
23फिर इस्राएल मिस्र में आया;
24तब उसने अपनी प्रजा को गिनती में बहुत बढ़ाया,
25उसने मिस्रियों के मन को ऐसा फेर दिया,
26उसने अपने दास मूसा को,
27उन्होंने मिस्रियों के बीच उसकी ओर से भाँति-भाँति के चिन्ह,
28उसने अंधकार कर दिया, और अंधियारा हो गया;
29उसने मिस्रियों के जल को लहू कर डाला,
30मेंढ़क उनकी भूमि में वरन् उनके राजा की कोठरियों में भी भर गए।
31उसने आज्ञा दी, तब डांस आ गए,
32उसने उनके लिये जलवृष्टि के बदले ओले,
33और उसने उनकी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को
34उसने आज्ञा दी तब अनगिनत टिड्डियाँ, और कीड़े आए,
35और उन्होंने उनके देश के सब अन्न आदि को खा डाला;
36उसने उनके देश के सब पहलौठों को,
37तब वह इस्राएल को सोना चाँदी दिलाकर निकाल लाया,
38उनके जाने से मिस्री आनन्दित हुए,
39उसने छाया के लिये बादल फैलाया,
भजन - Bhajan 105:40 - उन्होंने माँगा तब उसने बटेरें पहुँचाई,