1हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है;
3हे यहोवा, मैं देश-देश के लोगों के मध्य में तेरा धन्यवाद करूँगा,
4क्योंकि तेरी करुणा आकाश से भी ऊँची है,
5हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर हो!
6इसलिए कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएँ,
7परमेश्वर ने अपनी पवित्रता में होकर कहा है,
8गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है;
9मोआब मेरे धोने का पात्र है,
10मुझे गढ़वाले नगर में कौन पहुँचाएगा?
11हे परमेश्वर, क्या तूने हमको त्याग नहीं दिया?,
12शत्रुओं के विरुद्ध हमारी सहायता कर,
13परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएँगे,