1हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन् अपने ही नाम की महिमा,
2जाति-जाति के लोग क्यों कहने पाएँ,
3हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में हैं;
4उन लोगों की मूरतें सोने चाँदी ही की तो हैं,
5उनके मुँह तो रहता है परन्तु वे बोल नहीं सकती;
6उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकती;
7उनके हाथ तो रहते हैं, परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकती;
8जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनानेवाले हैं;
9हे इस्राएल, यहोवा पर भरोसा रख!
10हे हारून के घराने, यहोवा पर भरोसा रख!
11हे यहोवा के डरवैयों, यहोवा पर भरोसा रखो!
12यहोवा ने हमको स्मरण किया है; वह आशीष देगा;
14यहोवा तुम को और तुम्हारे वंश को भी अधिक बढ़ाता जाए।
15यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है,
17मृतक जितने चुपचाप पड़े हैं,