1हे परमेश्वर, तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा?
2मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियाँ करता रहूँ,
3हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे,
4ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, “मैं उस पर प्रबल हो गया;”
5परन्तु मैंने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है;
6मैं यहोवा के नाम का भजन गाऊँगा,