1पृथ्वी और जो कुछ उसमें है यहोवा ही का है;
2क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी,
3यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है?
4जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है,
5वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा,
6ऐसे ही लोग उसके खोजी है,
7हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो!
9हे फाटकों, अपने सिर ऊँचे करो
10वह प्रतापी राजा कौन है?