प्रस्तावना: प्रस्थान २८ में, दाऊद ईश्वर से मदद और अपने दुश्मनों से सुरक्षा के लिए पुकारते हैं। वे ईश्वर को अपना चट्टान और शरण मानते हैं, और उन्हें दुष्टता करने के लिए प्रार्थना करते हैं। दाऊद का अंतिम विश्वास ईश्वर की शक्ति, प्रेम और विश्वसनीयता में है।