1हे परमेश्वर, हमने अपने कानों से सुना,
2तूने अपने हाथ से जातियों को निकाल दिया,
3क्योंकि वे न तो अपनी तलवार के
4हे परमेश्वर, तू ही हमारा महाराजा है,
5तेरे सहारे से हम अपने द्रोहियों को
6क्योंकि मैं अपने धनुष पर भरोसा न रखूँगा,
7परन्तु तू ही ने हमको द्रोहियों से बचाया है,
9तो भी तूने अब हमको त्याग दिया
10तू हमको शत्रु के सामने से हटा देता है,
11तूने हमें कसाई की भेड़ों के
12तू अपनी प्रजा को सेंत-मेंत बेच डालता है,
13तू हमारे पड़ोसियों से हमारी
14तूने हमको अन्यजातियों के बीच
15दिन भर हमें तिरस्कार सहना पड़ता है,
16शत्रु और बदला लेनेवालों के कारण,
17यह सब कुछ हम पर बिता तो
19तो भी तूने हमें गीदड़ों के स्थान में पीस डाला,
20यदि हम अपने परमेश्वर का नाम भूल जाते,
21तो क्या परमेश्वर इसका विचार न करता?
22परन्तु हम दिन भर तेरे निमित्त
23हे प्रभु, जाग! तू क्यों सोता है?
24तू क्यों अपना मुँह छिपा लेता है?
25हमारा प्राण मिट्टी से लग गया;
26हमारी सहायता के लिये उठ खड़ा हो।