1मूर्ख ने अपने मन में कहा, “कोई परमेश्वर है ही नहीं।”
2परमेश्वर ने स्वर्ग पर से मनुष्यों के ऊपर दृष्टि की
3वे सब के सब हट गए; सब एक साथ बिगड़ गए;
4क्या उन सब अनर्थकारियों को कुछ भी ज्ञान नहीं,
5वहाँ उन पर भय छा गया जहाँ भय का कोई कारण न था।
6भला होता कि इस्राएल का पूरा उद्धार सिय्योन से निकलता!