1हे यहोवा, तू अपने देश पर प्रसन्न हुआ, याकूब को बँधुवाई से लौटा ले आया है।
2तूने अपनी प्रजा के अधर्म को क्षमा किया है;
3तूने अपने रोष को शान्त किया है;
4हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हमको पुनः स्थापित कर,
5क्या तू हम पर सदा कोपित रहेगा?
6क्या तू हमको फिर न जिलाएगा,
7हे यहोवा अपनी करुणा हमें दिखा,
8मैं कान लगाए रहूँगा कि परमेश्वर यहोवा क्या कहता है,
9निश्चय उसके डरवैयों के उद्धार का समय निकट है,
10करुणा और सच्चाई आपस में मिल गई हैं;
11पृथ्वी में से सच्चाई उगती
12हाँ, यहोवा उत्तम वस्तुएँ देगा,
13धर्म उसके आगे-आगे चलेगा,