
श्रृंगार गीत (Shringar Geet) 8
प्रेम विजयी
वरवाहक और कन्या एक-दूसरे को प्यार व्यक्त करते हैं, कहते हैं कि प्रेम मौत के समान मजबूत है और किसी चीज ने उन्हें अलग नहीं किया सकता।
1भला होता कि तू मेरे भाई के समान होता,
2मैं तुझको अपनी माता के घर ले चलती,
3काश, उसका बायाँ हाथ मेरे सिर के नीचे होता,
4हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराती हूँ,
5यह कौन है जो अपने प्रेमी पर टेक लगाए हुए
6मुझे नगीने के समान अपने हृदय पर लगा रख,
7पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता,
8हमारी एक छोटी बहन है,
9यदि वह शहरपनाह होती
10मैं शहरपनाह थी और मेरी छातियाँ उसके गुम्मट;
11बाल्हामोन में सुलैमान की एक दाख की बारी थी;
12मेरी निज दाख की बारी मेरे ही लिये है;
13तू जो बारियों में रहती है,
14हे मेरे प्रेमी, शीघ्रता कर,
