दानिय्याल 3:25

“फिर उसने कहा, “अब मैं देखता हूँ कि चार पुरुष आग के बीच खुले हुए टहल रहे हैं, और उनको कुछ भी हानि नहीं पहुँची; और चौथे पुरुष का स्वरूप परमेश्‍वर के पुत्र के सदृश्य है।””
— दानिय्याल 3:25 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: दानिय्याल 3

23और उसी धधकते हुए भट्ठे के बीच ये तीनों पुरुष, शद्रक, मेशक और अबेदनगो, बंधे हुए फेंक दिए गए।

24तब नबूकदनेस्सर राजा अचम्भित हुआ और घबराकर उठ खड़ा हुआ। और अपने मंत्रियों से पूछने लगा, “क्या हमने उस आग के बीच तीन ही पुरुष बंधे हुए नहीं डलवाए?” उन्होंने राजा को उत्तर दिया, “हाँ राजा, सच बात तो है।”

25फिर उसने कहा, “अब मैं देखता हूँ कि चार पुरुष आग के बीच खुले हुए टहल रहे हैं, और उनको कुछ भी हानि नहीं पहुँची; और चौथे पुरुष का स्वरूप परमेश्‍वर के पुत्र के सदृश्य है।”

26फिर नबूकदनेस्सर उस धधकते हुए भट्ठे के द्वार के पास जाकर कहने लगा, “हे शद्रक, मेशक और अबेदनगो, हे परमप्रधान परमेश्‍वर के दासों, निकलकर यहाँ आओ! यह सुनकर शद्रक, मेशक और अबेदनगो आग के बीच से निकल आए।

27जब अधिपति, हाकिम, राज्यपाल और राजा के मंत्रियों ने, जो इकट्ठे हुए थे, उन पुरुषों की ओर देखा, तब उनकी देह में आग का कुछ भी प्रभाव नहीं पाया; और उनके सिर का एक बाल भी न झुलसा, न उनके मोजे कुछ बिगड़े, न उनमें जलने की कुछ गन्ध पाई गई।

दानिय्याल 3 के बारे में: ज्वालामुखी भट्टी

दानिय्याल 3: ज्वालामुखी भट्टी

राजा नेबुचदनेजर सभी लोगों से एक सोने की मूर्ति की पूजा करने का आदेश देते हैं, लेकिन तीन यहूदी नौजवान इनकार करते हैं और एक ज्वालामुखी में डाल दिए जाते हैं। उन्हें भगवान से संरक्षण मिलता है और वे उपरोध से बच जाते हैं।

व्याख्या

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दानिय्याल 3 में लोग