यहेजकेल 20:15

“फिर मैंने जंगल में उनसे शपथ खाई कि जो देश मैंने उनको दे दिया, और जो सब देशों का शिरोमणि है, जिसमें दूध और मधु की धराएँ बहती हैं, उसमें उन्हें न पहुँचाऊँगा,”
— यहेजकेल 20:15 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: यहेजकेल 20

13तो भी इस्राएल के घराने ने जंगल में मुझसे बलवा किया; वे मेरी विधियों पर न चले, और मेरे नियमों को तुच्छ जाना, जिन्हें यदि मनुष्य माने तो वह उनके कारण जीवित रहेगा; और उन्होंने मेरे विश्रामदिनों को अति अपवित्र किया। “तब मैंने कहा, मैं जंगल में इन पर अपनी जलजलाहट भड़काकर इनका अन्त कर डालूँगा।

14परन्तु मैंने अपने नाम के निमित्त ऐसा किया कि वे उन जातियों के सामने, जिनके देखते मैं उनको निकाल लाया था, अपवित्र न ठहरे।

15फिर मैंने जंगल में उनसे शपथ खाई कि जो देश मैंने उनको दे दिया, और जो सब देशों का शिरोमणि है, जिसमें दूध और मधु की धराएँ बहती हैं, उसमें उन्हें न पहुँचाऊँगा,

16क्योंकि उन्होंने मेरे नियम तुच्छ जाने और मेरी विधियों पर न चले, और मेरे विश्रामदिन अपवित्र किए थे; इसलिए कि उनका मन उनकी मूरतों की ओर लगा रहा।

17तो भी मैंने उन पर कृपा की दृष्टि की, और उन्हें नाश न किया, और न जंगल में पूरी रीति से उनका अन्त कर डाला।

यहेजकेल 20 के बारे में: इस्राएल पर भगवान का क्रोध और दया।

यहेजकेल 20: इस्राएल पर भगवान का क्रोध और दया।

यहूकेल के इस अध्याय 20 में, भगवान इस्राएल के ऊपर अपने प्रति बाघबाज़ी के इतिहास पर चर्चा करते हैं। वह विस्तार से बताते हैं कि इस्राएलियों ने झूठे भगवानों की पूजा की और पापी आचरण में प्रवृत्त हो गए जिससे उन्हें बाबिल में निर्वासन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, भगवान इस्राएल पर अपनी दया का प्रकट करते हैं और उन्हें अपनी मातृभूमि में पुनर्स्थापित करने और उनके पापों को क्षमा करने का वायदा करते हैं।

व्याख्या

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