यहेजकेल 20:5
“और उनसे कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : जिस दिन मैंने इस्राएल को चुन लिया, और याकूब के घराने के वंश से शपथ खाई, और मिस्र देश में अपने को उन पर प्रगट किया, और उनसे शपथ खाकर कहा, मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ,”
संदर्भ: यहेजकेल 20
3“हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएली पुरनियों से यह कह, प्रभु यहोवा यह कहता है, क्या तुम मुझसे प्रश्न करने को आए हो? प्रभु यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की सौगन्ध, तुम मुझसे प्रश्न करने न पाओगे।
4हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू उनका न्याय न करेगा? क्या तू उनका न्याय न करेगा? उनके पुरखाओं के घिनौने काम उन्हें जता दे,
5और उनसे कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : जिस दिन मैंने इस्राएल को चुन लिया, और याकूब के घराने के वंश से शपथ खाई, और मिस्र देश में अपने को उन पर प्रगट किया, और उनसे शपथ खाकर कहा, मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ,
6उसी दिन मैंने उनसे यह भी शपथ खाई, कि मैं तुमको मिस्र देश से निकालकर एक देश में पहुँचाऊँगा, जिसे मैंने तुम्हारे लिये चुन लिया है; वह सब देशों का शिरोमणि है, और उसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं।
7फिर मैंने उनसे कहा, जिन घिनौनी वस्तुओं पर तुम में से हर एक की आँखें लगी हैं, उन्हें फेंक दो; और मिस्र की मूरतों से अपने को अशुद्ध न करो; मैं ही तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
यहेजकेल 20 के बारे में: इस्राएल पर भगवान का क्रोध और दया।

यहूकेल के इस अध्याय 20 में, भगवान इस्राएल के ऊपर अपने प्रति बाघबाज़ी के इतिहास पर चर्चा करते हैं। वह विस्तार से बताते हैं कि इस्राएलियों ने झूठे भगवानों की पूजा की और पापी आचरण में प्रवृत्त हो गए जिससे उन्हें बाबिल में निर्वासन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, भगवान इस्राएल पर अपनी दया का प्रकट करते हैं और उन्हें अपनी मातृभूमि में पुनर्स्थापित करने और उनके पापों को क्षमा करने का वायदा करते हैं।
व्याख्या
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