यहेजकेल 40:4

“उस पुरुष ने मुझसे कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, अपनी आँखों से देख, और अपने कानों से सुन; और जो कुछ मैं तुझे दिखाऊँगा उस सब पर ध्यान दे, क्योंकि तू इसलिए यहाँ पहुँचाया गया है कि मैं तुझे ये बातें दिखाऊँ; और जो कुछ तू देखे वह इस्राएल के घराने को बताए।””
— यहेजकेल 40:4 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: यहेजकेल 40

2अपने दर्शनों में परमेश्‍वर ने मुझे इस्राएल के देश में पहुँचाया और वहाँ एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर खड़ा किया, जिस पर दक्षिण ओर मानो किसी नगर का आकार था।

3जब वह मुझे वहाँ ले गया, तो मैंने क्या देखा कि पीतल का रूप धरे हुए और हाथ में सन का फीता और मापने का बाँस लिए हुए एक पुरुष फाटक में खड़ा है।

4उस पुरुष ने मुझसे कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, अपनी आँखों से देख, और अपने कानों से सुन; और जो कुछ मैं तुझे दिखाऊँगा उस सब पर ध्यान दे, क्योंकि तू इसलिए यहाँ पहुँचाया गया है कि मैं तुझे ये बातें दिखाऊँ; और जो कुछ तू देखे वह इस्राएल के घराने को बताए।”

5और देखो, भवन के बाहर चारों ओर एक दीवार थी, और उस पुरुष के हाथ में मापने का बाँस था, जिसकी लम्बाई ऐसे छः हाथ की थी जो साधारण हाथों से चार अंगुल भर अधिक है; अतः उसने दीवार की मोटाई मापकर बाँस भर की पाई, फिर उसकी ऊँचाई भी मापकर बाँस भर की पाई।

6तब वह उस फाटक के पास आया जिसका मुँह पूर्व की ओर था, और उसकी सीढ़ी पर चढ़कर फाटक की दोनों डेवढ़ियों की चौड़ाई मापकर एक-एक बाँस भर की पाई।

यहेजकेल 40 के बारे में: नए मंदिर की एक दृश्य।

यहेजकेल 40: नए मंदिर की एक दृश्य।

यहेजकीएल के पुस्तक के चौबीसवें अध्याय में, भगवान द्वारा निर्मित किए जाने वाले एक नए मंदिर की दर्शनी प्राप्त करने वाले भविष्यवक्ता यहेजकीएल को मिलती है। मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसमें प्रत्येक खंड की माप, और शांति के नये मंदिर में सेवा करने के लिए पुरोहितों की नियुक्ति भी शामिल है।

व्याख्या

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