उत्पत्ति 3:13
“तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, “तूने यह क्या किया है?” स्त्री ने कहा, “सर्प ने मुझे बहका दिया, तब मैंने खाया।””
संदर्भ: उत्पत्ति 3
11यहोवा परमेश्वर ने कहा, “किसने तुझे बताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैंने तुझे मना किया था, क्या तूने उसका फल खाया है?”
12आदम ने कहा, “जिस स्त्री को तूने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैंने खाया।”
13तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, “तूने यह क्या किया है?” स्त्री ने कहा, “सर्प ने मुझे बहका दिया, तब मैंने खाया।”
14तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, “तूने जो यह किया है इसलिए तू सब घरेलू पशुओं, और सब जंगली पशुओं से अधिक श्रापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा;
15और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूँगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।”
उत्पत्ति 3 के बारे में: मानव की सृष्टि

पुरुष और स्त्री भगवान का अज्ञान करते हैं और निषिद्ध पेड़ से खाते हैं। इससे उन्हें अहंकार महसूस होता है और वे शर्मिंदा महसूस करते हैं। भगवान ने उन्हें सजा दी और उन्हें बाग से निकालना पड़ा।
व्याख्या
टिप्पणी: उत्पत्ति 3 वह अध्याय है जिसमें मनुष्य का पतन वर्णित है। इसमें सर्प ईव को प्रलोभित करने लगता है कि उन्हें वह परिज्ञान का फल खाने को ले जाएगा जिसे भगवान ने उन्हें करने से मना कर दिया था। ईव को सर्प की वाद वाणी से भ्रमित किया जाता है कि अगर वह फल खाएगी तो वह भगवान की तरह बन जाएगी। फिर वह आदम को भी फल देती है, जो भी खा लेता है। उनकी अवविनयता के परिणामस्वरूप, भगवान सर्प, पृथ्वी, और आदम और ईव को शापित करते हैं।
मनुष्य का पतन बाइबिल में एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि यह दुनिया में पाप और मौत के आरंभ का सूचक है। यह अनुशासन का परिणामों और भगवान की आज्ञाओं का पालन करने की महत्वता की जानकारी है। यह आज के लिए हमें चेतावनी है कि हमे जगत के वादों से प्रलोभित न होना चाहिए, बल्कि भगवान के प्रति विश्वासयुक्त रहना चाहिए।