उत्पत्ति 38:22
“इसलिए उसने यहूदा के पास लौटकर कहा, “मुझे वह नहीं मिली; और उस स्थान के लोगों ने कहा, 'यहाँ तो कोई देवदासी न थी।'””
संदर्भ: उत्पत्ति 38
20तब यहूदा ने बकरी का बच्चा अपने मित्र उस अदुल्लामवासी के हाथ भेज दिया कि वह रेहन रखी हुई वस्तुएँ उस स्त्री के हाथ से छुड़ा ले आए; पर वह स्त्री उसको न मिली।
21तब उसने वहाँ के लोगों से पूछा, “वह देवदासी जो एनैम में मार्ग की एक ओर बैठी थी, कहाँ है?” उन्होंने कहा, “यहाँ तो कोई देवदासी न थी।”
22इसलिए उसने यहूदा के पास लौटकर कहा, “मुझे वह नहीं मिली; और उस स्थान के लोगों ने कहा, 'यहाँ तो कोई देवदासी न थी।'”
23तब यहूदा ने कहा, “अच्छा, वह बन्धक उसी के पास रहने दे, नहीं तो हम लोग तुच्छ गिने जाएँगे; देख, मैंने बकरी का यह बच्चा भेज दिया था, पर वह तुझे नहीं मिली।”
24लगभग तीन महीने के बाद यहूदा को यह समाचार मिला, “तेरी बहू तामार ने व्यभिचार किया है; वरन् वह व्यभिचार से गर्भवती भी हो गई है।” तब यहूदा ने कहा, “उसको बाहर ले आओ कि वह जलाई जाए।”
उत्पत्ति 38 के बारे में: यहूदा और तमर की कहानी

इस अध्याय में यहूदा और तामर, और यहूदा और उसके तीन पुत्रों की कहानियां हैं।
व्याख्या
उत्पत्ति 38 एक अध्याय है जो यहूदा और तामार की कहानी पर ध्यान केंद्रित करता है। यह धोखा, धोखा और अंततः मुक्ति की कहानी है।
यह अध्याय यहूदा के अपने पुत्र इर के लिए एक पत्नी चुनने के साथ शुरू होता है। जब इर मर जाता है, तो यहूदा अपने दूसरे पुत्र ओनन को कहता है कि तामार से विवाह करें और भाई का कर्तव्य पूरा करें। ओनन इनकार करता है, और भगवान उसकी अनुशासन के लिए उसे प्रतिफलित करते हैं। फिर यहूदा तामार से कहता है कि वह एक विधवा बने रहे, जब तक उसका तीसरा पुत्र, शेलाह, उसे शादी के लिए पुराना हो जाए।