उत्पत्ति 45:4
“फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, “मेरे निकट आओ।” यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, “मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूँ, जिसको तुम ने मिस्र आनेवालों के हाथ बेच डाला था।”
संदर्भ: उत्पत्ति 45
2तब वह चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगा; और मिस्रियों ने सुना, और फ़िरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
3तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, “मैं यूसुफ हूँ, क्या मेरा पिता अब तक जीवित है?” इसका उत्तर उसके भाई न दे सके; क्योंकि वे उसके सामने घबरा गए थे।
4फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, “मेरे निकट आओ।” यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, “मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूँ, जिसको तुम ने मिस्र आनेवालों के हाथ बेच डाला था।
5अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहाँ बेच डाला, इससे उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे तुम्हारे आगे भेज दिया है।
6क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है; और अब पाँच वर्ष और ऐसे ही होंगे कि उनमें न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
उत्पत्ति 45 के बारे में: जोसेफ अपने भाइयों को अपनी पहचान दिखाता है

जोसेफ अपने भाइयों को क्षमा करता है और उन्हें बताता है कि वे अपने पिता याकूब और उनके परिवार को मिश्र में ले आएं।
व्याख्या
उत्पत्ति 45 उत्पत्ति के पुस्तक में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, क्योंकि यह जोसेफ और उसके भाइयों की पुनर्मिलन की घटना का पता लगाने वाला है। वर्षों की अलगाव के बाद, जोसेफ अपने भाइयों को अपनी वास्तविक पहचान बताते हैं और उनके पिछले गलतियों के लिए उन्हें क्षमा कर देते हैं।
यह अध्याय जोसेफ के भाइयों को अपनी वास्तविक पहचान बताते हुए एक भावनात्मक व्याकुलता से शुरू होता है। उन्हें भावनात्मक अवसाद और रोते हुए प्रभावित होते हैं, और उनके भाइयों को हैरानी होती है। फिर जोसेफ उन्हें बताते हैं कि भगवान ने उनके लिए एक योजना रखी थी, और उनका पीड़ा से उसका भाग था। उन्होंने उन्हें बताया कि ईश्वर ने उन्हें उनके आगे भेजा था ताकि जीवन को संरक्षित रखा जा सके, और कि वे खुद से गुस्सा न करें।