यहूदियों के लिए पुस्तक 11:40

“क्योंकि परमेश्‍वर ने हमारे लिये पहले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुँचे।”
— यहूदियों के लिए पुस्तक 11:40 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: यहूदियों के लिए पुस्तक 11

38और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे। संसार उनके योग्य न था।

39विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तो भी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।

40क्योंकि परमेश्‍वर ने हमारे लिये पहले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुँचे।

यहूदियों के लिए पुस्तक 11 के बारे में: विश्वास के उदाहरण

यहूदियों के लिए पुस्तक 11: विश्वास के उदाहरण

यह अध्याय पुरानी धरोहर के लोगों के उदाहरण प्रस्तुत करता है जिन्होंने विश्वास के साथ जीवन जिया, पाठकों को उनके उदाहरण का अनुसरण करने और अपने स्वयं के विश्वास में सहयोग करने के लिए प्रेरित करता है।

व्याख्या

हिब्रू 11 एक अध्याय है जो विश्वास की शक्ति पर बोलता है। यह विश्वास को "उम्मीदीय संदेह, द्रढ़ मान जिन बातों का आस्था" पर परिभाषित करके शुरू होता है। इस परिभाषा के बाद, ऐसे कई उदाहरणों की एक लंबी सूची आती है जिन्होंने भगवान में विश्वास रखा था और उसका पालन किया था। इन उदाहरणों में अबेल, एनोच, नूह, इब्राहीम, सारा, इसहाक, याकूब, जोसेफ, मोशे और रहाब शामिल हैं। इन सभी व्यक्तियों ने भगवान में विश्वास रखा था और उन्हें किसी न किसी तरह से उसका पालन किया गया था।

इस अध्याय में आगे जाकर यह समझाता है कि विश्वास भगवान को प्रसन्न करने की कुंजी है। यह कहता है कि "विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना असंभव है, क्योंकि जो भी भगवान के करीब आना चाहता है, उसे विश्वास होना चाहिए कि उसका होना है और वह उन्हें इसकर बहुती महत्वपूर्ण जोज़ीड रिवार्ड के साथ उधारू था। यह हमें याद दिलाता है कि विश्वास भगवान के साथ हमारे संबंध में अनिवार्य है।

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