मार्क ग्रंथ 12:7
“पर उन किसानों ने आपस में कहा; ‘यही तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, तब विरासत हमारी हो जाएगी।’”
संदर्भ: मार्क ग्रंथ 12
5फिर उसने एक और को भेजा, और उन्होंने उसे मार डाला; तब उसने और बहुतों को भेजा, उनमें से उन्होंने कितनों को पीटा, और कितनों को मार डाला।
6अब एक ही रह गया था, जो उसका प्रिय पुत्र था; अन्त में उसने उसे भी उनके पास यह सोचकर भेजा कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे।
7पर उन किसानों ने आपस में कहा; ‘यही तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, तब विरासत हमारी हो जाएगी।’
8और उन्होंने उसे पकड़कर मार डाला, और दाख की बारी के बाहर फेंक दिया।
9“इसलिए दाख की बारी का स्वामी क्या करेगा? वह आकर उन किसानों का नाश करेगा, और दाख की बारी औरों को दे देगा।
मार्क ग्रंथ 12 के बारे में: दुष्ट किरायेदारों की उपमा

इस अध्याय 12 में, यीशु मसीह महान आज्ञाका उपदेश देते हैं जो सबसे महत्वपूर्ण है और पुनरुत्थान के बारे में।
व्याख्या
मार्क 12 एक अध्याय है जो यीशु के उपदेशों और वह दिन के धार्मिक नेताओं के संवाद पर केंद्रित है। इस अध्याय में, यीशु से पूछे गए कई प्रश्न हैं जिन्हें धार्मिक नेताओं ने उसे फंसाने का प्रयास किया। यीशु प्रत्येक प्रश्न का मार्गदर्शन और अनुभूति के साथ जवाब देते हैं, अक्सर प्रश्नकर्ता के ऊपर प्रश्न लौटाते हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रेम करने और अपने पड़ोसी से प्रेम करने की महत्वता, सीजर को कर देने की महत्वता की भी चर्चा की। उन्होंने मरनेवालों की पुनर्जीवन की भी चर्चा की, और सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा की।
पूरे अध्याय में, यीशु को एक बुद्धिमान और ज्ञानी शिक्षक के रूप में पेश किया गया है, जो उस समय के धार्मिक नेताओं को चुनौती देने से नहीं घबराता। उन्होंने प्राधिकार और अनुभव के साथ बोला, और उनके शब्द सत्य और समझ में भरे हुए थे। वह एक शिक्षक है जो सत्य बोलने से डरता नहीं है, चाहे वह प्रचलित हो या नहीं।