मार्क ग्रंथ 8:31
“और वह उन्हें सिखाने लगा, कि मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुःख उठाए, और पुरनिए और प्रधान याजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे।”
संदर्भ: मार्क ग्रंथ 8
29उसने उनसे पूछा, “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?” पतरस ने उसको उत्तर दिया, “तू मसीह है।”
30तब उसने उन्हें चिताकर कहा कि मेरे विषय में यह किसी से न कहना।
31और वह उन्हें सिखाने लगा, कि मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुःख उठाए, और पुरनिए और प्रधान याजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे।
32उसने यह बात उनसे साफ-साफ कह दी। इस पर पतरस उसे अलग ले जाकर डाँटने लगा।
33परन्तु उसने फिरकर, और अपने चेलों की ओर देखकर पतरस को डाँटकर कहा, “हे शैतान, मेरे सामने से दूर हो; क्योंकि तू परमेश्वर की बातों पर नहीं, परन्तु मनुष्य की बातों पर मन लगाता है।”
मार्क ग्रंथ 8 के बारे में: पीटर की सार्वजनिक घोषणा, यीशु मौत की भविष्यवाणी।

यीशु चार हज़ार लोगों को भोजन प्रदान करते हैं और फरीसियों के खमीर के बारे में सिखाते हैं।
व्याख्या
मार्क 8 मार्क के सुसमाचार का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, क्योंकि यह यीशु की यरूशलम की यात्रा और उसकी अंतिम मौत की शुरुआत दर्शाता है। इस अध्याय में, यीशु अपने शिष्यों को अपनी पहचान और मिशन की सच्चाई का पता लगाना शुरू करते हैं। उन्होंने चार हजार लोगों का अद्भुत भोजन किया, और फिर अपने शिष्यों को फरीसियों और हेरोड की खमीर से चेतावनी देते हैं।
फिर यीशु अपने शिष्यों को सीसारिया फिलिप्पी क्षेत्र ले जाते हैं, जहां वे उनसे पूछते हैं कि लोग उसे कौन समझते हैं। जवाब देने के बाद, यीशु फिर उनसे पूछते हैं वे कौन समझते हैं कि वह कौन हैं। पीटर उत्तर देते हैं कि यीशु मसीह हैं, और फिर यीशु उन्हें इसका मतलब समझाने लगते हैं कि शिष्यता की कीमत क्या है। उन्होंने कहा कि उन्हें पीड़ा सहनी पड़ेगी, अस्वीकरण किया जायेगा, और मारा जायेगा, और फिर फिर जी उठेगा।