BiblePics
होम
बाइबल की पुस्तकें
नीतिवचन
4
नीतिवचन 4
नीतिवचन 4
ज्ञान का मार्ग
सारांश: सुलेमान पठकों से विवेक का मार्ग चुनने की आवाज करते हैं, अपने दिलों की हिफाजत करने और धार्मिक मार्ग पर सच बने रहने की।
अध्याय पढ़ें
Book
उत्पत्ति
उपद्रवि (Upadravi)
लैवीयतन्
गिनती
द्वितीय विधान
यहोशुआ
न्यायियों
रूथ
1 समुएल
2 समुएल
१ राजाओं
2 राजाओं की किताब
१ इतिहास-गाथा
2 इतिहास
एज्रा
नहेमायाः
एस्तेर्र
आयुब
भजन - Bhajan
नीतिवचन
अभिज्ञानशास्त्र
श्रृंगार गीत (Shringar Geet)
यशायाह
यर्मियाह
विलापग्रंथ
यहेजकेल
दानिय्याल
होशेया
योएल
आमोस
ओवद्याह
योना
मीका
नहूम
हबक्कूक
दस्तीरे जफनिया
हाग्गाई
ज़खरिया (Zechariah)
मलाकी
मत्ती की बाइबिल
मार्क ग्रंथ
लूका
यूहन्ना
प्रेरितों के कामों का अनुसार (Preriton Ke Kamo Ka Anusar)
रोमियों किताब
1 कुरिन्थीयों
2 कुरिन्थियों
गलातियों से पत्रिका
एफिसीयों का पत्रिका
फिलिप्पियों
कुलुस्सीयों
१ थिस्सलोनिकियों का पहला पत्रिका
2 थिस्सलोनिकीयों
1 तीमुथियुस
2 तीमुथियुस
तीतुस
फिलेमोन
यहूदियों के लिए पुस्तक
याकूब
1 पतरसीya वाचन
2 पतरस
१ यूहन्ना
2 यूहन्ना
३ यूहन्ना
यहूदा
प्रकटिकरण
संस्करण
Eliot Indian Bible
1
हे मेरे पुत्रों, पिता की शिक्षा सुनो,
2
क्योंकि मैंने तुम को उत्तम शिक्षा दी है;
3
देखो, मैं भी अपने पिता का पुत्र था,
4
और मेरा पिता मुझे यह कहकर सिखाता था,
5
बुद्धि को प्राप्त कर, समझ को भी प्राप्त कर;
6
बुद्धि को न छोड़ और वह तेरी रक्षा करेगी;
7
बुद्धि श्रेष्ठ है इसलिए उसकी प्राप्ति के लिये यत्न कर;
8
उसकी बड़ाई कर, वह तुझको बढ़ाएगी;
9
वह तेरे सिर पर शोभायमान आभूषण बांधेगी;
10
हे मेरे पुत्र, मेरी बातें सुनकर ग्रहण कर,
11
मैंने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है;
12
जिसमें चलने पर तुझे रोक टोक न होगी,
13
शिक्षा को पकड़े रह, उसे छोड़ न दे;
14
दुष्टों की डगर में पाँव न रखना,
15
उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल,
16
क्योंकि दुष्ट लोग यदि बुराई न करें, तो उनको नींद नहीं आती;
17
क्योंकि वे दुष्टता की रोटी खाते,
18
परन्तु धर्मियों की चाल, भोर-प्रकाश के समान है,
19
दुष्टों का मार्ग घोर अंधकारमय है;
20
हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन,
21
इनको अपनी आँखों से ओझल न होने दे;
22
क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का,
23
सबसे अधिक अपने मन की रक्षा कर;
24
टेढ़ी बात अपने मुँह से मत बोल,
25
तेरी आँखें सामने ही की ओर लगी रहें,
26
अपने पाँव रखने के लिये मार्ग को समतल कर,
27
न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर;
नीतिवचन 3
नीतिवचन 5
पाठ सेटिंग्स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न
नीतिवचन में कितने अध्याय हैं?