1हे परमेश्वर तू, जिसकी मैं स्तुति करता हूँ, चुप न रह!
2क्योंकि दुष्ट और कपटी मनुष्यों ने मेरे विरुद्ध मुँह खोला है,
3उन्होंने बैर के वचनों से मुझे चारों ओर घेर लिया है,
4मेरे प्रेम के बदले में वे मेरी चुगली करते हैं,
5उन्होंने भलाई के बदले में मुझसे बुराई की
6तू उसको किसी दुष्ट के अधिकार में रख,
7जब उसका न्याय किया जाए, तब वह दोषी निकले,
9उसके बच्चे अनाथ हो जाएँ,
10और उसके बच्चे मारे-मारे फिरें, और भीख माँगा करे;
11महाजन फंदा लगाकर, उसका सर्वस्व ले ले;
12कोई न हो जो उस पर करुणा करता रहे,
14उसके पितरों का अधर्म यहोवा को स्मरण रहे,
15वह निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहे,
16क्योंकि वह दुष्ट, करुणा करना भूल गया
17वह श्राप देने से प्रीति रखता था, और श्राप उस पर आ पड़ा;
18वह श्राप देना वस्त्र के समान पहनता था,
19वह उसके लिये ओढ़ने का काम दे,
20यहोवा की ओर से मेरे विरोधियों को,
21परन्तु हे यहोवा प्रभु, तू अपने नाम के निमित्त मुझसे बर्ताव कर;
22क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूँ,
23मैं ढलती हुई छाया के समान जाता रहा हूँ;
24उपवास करते-करते मेरे घुटने निर्बल हो गए;
25मेरी तो उन लोगों से नामधराई होती है;
26हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी सहायता कर!
27जिससे वे जाने कि यह तेरा काम है,
28वे मुझे कोसते तो रहें, परन्तु तू आशीष दे!
29मेरे विरोधियों को अनादररूपी वस्त्र पहनाया जाए,
30मैं यहोवा का बहुत धन्यवाद करूँगा,
31क्योंकि वह दरिद्र की दाहिनी ओर खड़ा रहेगा,