1हे यहोवा, मैंने तुझे पुकारा है; मेरे लिये फुर्ती कर!
2मेरी प्रार्थना तेरे सामने सुगन्ध धूप,
3हे यहोवा, मेरे मुँह पर पहरा बैठा,
4मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे;
5धर्मी मुझ को मारे तो यह करुणा मानी जाएगी,
6जब उनके न्यायी चट्टान के ऊपर से गिराए गए,
7जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं,
8परन्तु हे यहोवा प्रभु, मेरी आँखें तेरी ही ओर लगी हैं;
9मुझे उस फंदे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है,
10दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फँसें,