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भजन - Bhajan
61
भजन - Bhajan 61
भजन - Bhajan 61
भगवान में शरण पाना
प्रार्थना 61 में प्रार्थनाकर्ता के ह्रदय की तड़प व्यक्त की जाती है कि वह परमेश्वर में शरण पाना चाहता है। प्रार्थनाकर्ता कठिन परिस्थितियों में परमेश्वर की सहायता के लिए चिल्लाता है और अंततः परमेश्वर की हाजिरी में शांति और सुरक्षा प्राप्त करता है।
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2 यूहन्ना
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संस्करण
Eliot Indian Bible
1
हे परमेश्वर, मेरा चिल्लाना सुन,
2
मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूँगा,
3
क्योंकि तू मेरा शरणस्थान है,
4
मैं तेरे तम्बू में युगानुयुग बना रहूँगा।
5
क्योंकि हे परमेश्वर, तूने मेरी मन्नतें सुनीं,
6
तू राजा की आयु को बहुत बढ़ाएगा;
7
वह परमेश्वर के सम्मुख सदा बना रहेगा;
8
इस प्रकार मैं सर्वदा तेरे नाम का भजन गा-गाकर
भजन - Bhajan 60
भजन - Bhajan 62
पाठ सेटिंग्स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न
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