प्रसंग ९२ की सारांश: प्रसंग ९२ में प्रभु की विश्वासनीयता और भलाई के लिए उसकी प्रशंसा और धन्यवाद का गान है। प्रभु की सभी कृतियों की महिमा करते हुए सलमानी के द्वारा जोय और आभार व्यक्त किया गया है। सलमानी अर्थात उन लोगों की हानि और धर्मी लोगों की विजय को स्विकार करते हुए कहते हैं कि जो आलय में रोटी हुए हैं, वे वृद्धावस्था में भी वहीं पनपेंगे और पर्ण लाएंगे। प्रसंग धर्मिष्ठता और विश्वस्त प्रेम के लिए प्रभु की प्रशंसा करने के एक आवाज के साथ समाप्त होता है।