BiblePics LogoBiblePics LogoBiblePics
  • पढ़ें
  • मिलें
  • चैट
  • देखें
  • खोजें
  • खरीदें
डाउनलोड करेंक्रोम में जोड़ें
Home
पढ़ें
मिलें
चैट
देखें
Prayer
BiblePics LogoBiblePics Logo

Experience the Bible through AI-generated art and conversations with biblical figures.

Explore

Read the BibleBiblical FiguresAI ChatAboutContact

Connect

hello@biblepics.co

footer.newsletter.title

footer.newsletter.description

© 2023 – 2026 BiblePics. All rights reserved.

Privacy PolicyImage License
  1. होम
  2. बाइबल की पुस्तकें
  3. प्रकटिकरण
  4. 5
प्रकटिकरण 5
प्रकटिकरण 5

प्रकटिकरण 5

थ्यातीरा के चर्च को पत्र

यह अध्याय थियातीरा के गिर्जाघर को एक पत्र से भगवान की ओर से भेजा गया है, जिसमें उन्हें झूठे शिक्षाओं और अनैतिकता को सहने की दोषी ठहराया गया।
1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैंने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्द की गई थी।
2फिर मैंने एक बलवन्त स्वर्गदूत को देखा जो ऊँचे शब्द से यह प्रचार करता था “इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?”
3और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला।
4तब मैं फूट-फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला।
5इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझसे कहा, “मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है।”
6तब मैंने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानो एक वध किया हुआ मेम्‍ना खड़ा देखा; उसके सात सींग और सात आँखें थीं; ये परमेश्‍वर की सातों आत्माएँ हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं।
7उसने आकर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्तक ले ली,
8जब उसने पुस्तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्‍ने के सामने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएँ हैं।
9और वे यह नया गीत गाने लगे,
10“और उन्हें हमारे परमेश्‍वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।”
11 जब मैंने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्वर्गदूतों का शब्द सुना, जिनकी गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
12और वे ऊँचे शब्द से कहते थे, “वध किया हुआ मेम्‍ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और स्तुति के योग्य है।”
13 फिर मैंने स्वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब रची हुई वस्तुओं को, और सब कुछ को जो उनमें हैं, यह कहते सुना, “जो सिंहासन पर बैठा है, उसकी, और मेम्‍ने की स्तुति, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।”
14और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिरकर दण्डवत् किया।
Divider

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस अध्याय के बारे में सामान्य प्रश्न