श्रृंगार गीत (Shringar Geet) 2

वसंत में प्यार

विवाही गूँथ अपनी दुल्हन से प्रेम व्यक्त करते हैं और उसे संग चलने के लिए आमंत्रित करते हैं।

एआई चित्रण: श्रृंगार गीत (Shringar Geet) 2
श्रृंगार गीत (Shringar Geet) 2 · एआई चित्रण
1मैं शारोन देश का गुलाब
2जैसे सोसन फूल कटीले पेड़ों के बीच
3जैसे सेब का वृक्ष जंगल के वृक्षों के बीच में,
4वह मुझे भोज के घर में ले आया,
5मुझे किशमिश खिलाकर संभालो, सेब खिलाकर बल दो:
6काश, उसका बायाँ हाथ मेरे सिर के नीचे होता,
7हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों
8मेरे प्रेमी का शब्द सुन पड़ता है!
9मेरा प्रेमी चिकारे या जवान हिरन के समान है।
10मेरा प्रेमी मुझसे कह रहा है,
11क्योंकि देख, सर्दी जाती रही;
12पृथ्वी पर फूल दिखाई देते हैं,
13अंजीर पकने लगे हैं,
14हे मेरी कबूतरी, पहाड़ की दरारों में और टीलों के कुंज में तेरा मुख मुझे देखने दे,
15जो छोटी लोमड़ियाँ दाख की बारियों को बिगाड़ती हैं, उन्हें पकड़ ले,
16मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ,
17जब तक दिन ठण्डा न हो और छाया लम्बी होते-होते मिट न जाए,

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