प्रेम की लालसा के बारे में बाइबल क्या कहती है?
प्रेम की लालसा पर प्रमुख शास्त्र और आध्यात्मिक मार्गदर्शन
बाइबल इस विषय पर कई स्थानों पर विचार करती है। प्रेम और स्नेह एक महत्वपूर्ण भाग हैं जो हमारे दिलों में उत्कंठा और खोज होती है। यह इस प्रकार का भाव है जो हमें परमेश्वर के वचनों के माध्यम से उसकी प्रेमकथा की ओर खींचता है जो हमें आत्मिक संतोष और समृद्धि देता है।
प्रेम की लालसा के बारे में बाइबल के पद
भजन - Bhajan 37:4ERV
“यहोवा को अपने सुख का मूल जान,”
1 कुरिन्थीयों 13:4–6ERV
“प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। अशोभनीय व्यवहार नहीं करता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।”
नीतिवचन 19:22ERV
“मनुष्य में निष्ठा सर्वोत्तम गुण है,”
यूहन्ना 15:13ERV
“इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।”
कुलुस्सीयों 3:14ERV
“और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्ध है बाँध लो।”
१ यूहन्ना 4:18ERV
“प्रेम में भय नहीं होता, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय का सम्बन्ध दण्ड से होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।”
1 पतरसीya वाचन 4:8ERV
“सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है।”