उत्पत्ति 18:26
“यहोवा ने कहा, “यदि मुझे सदोम में पचास धर्मी मिलें, तो उनके कारण उस सारे स्थान को छोड़ूँगा।””
संदर्भ: उत्पत्ति 18
24कदाचित् उस नगर में पचास धर्मी हों तो क्या तू सचमुच उस स्थान को नाश करेगा और उन पचास धर्मियों के कारण जो उसमें हों न छोड़ेगा?
25इस प्रकार का काम करना तुझ से दूर रहे कि दुष्ट के संग धर्मी को भी मार डाले और धर्मी और दुष्ट दोनों की एक ही दशा हो। यह तुझ से दूर रहे। क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे?”
26यहोवा ने कहा, “यदि मुझे सदोम में पचास धर्मी मिलें, तो उनके कारण उस सारे स्थान को छोड़ूँगा।”
27फिर अब्राहम ने कहा, “हे प्रभु, सुन मैं तो मिट्टी और राख हूँ; तो भी मैंने इतनी ढिठाई की कि तुझ से बातें करूँ।
28कदाचित् उन पचास धर्मियों में पाँच घट जाएँ; तो क्या तू पाँच ही के घटने के कारण उस सारे नगर का नाश करेगा?” उसने कहा, “यदि मुझे उसमें पैंतालीस भी मिलें, तो भी उसका नाश न करूँगा।”
उत्पत्ति 18 के बारे में: इसक की जन्म का वादा।

भागवत गाथा के अध्याय 18 का सारांश: भगवान इब्राहीम के पास आते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनकी वृद्धा पत्नी सारा एक पुत्र को जन्म देगी। इब्राहीम हंसते हैं, परंतु सारा गर्भवती हो जाती है और उसे यित्सहक नामक पुत्र की प्रसूति होती है।
व्याख्या
उससे पहले उन तीन आदमियों की यात्रा के बारे में उस यहूदी आदमी इब्राहीम और सारे से बातचीत है जिन्हें बाद में परमेश्वर के दूतों के रूप में पहचाना जाता है और यह बताने के लिए भेजा गया है कि इब्राहीम और सारे का एक पुत्र होगा। यह यहूदी धर्मग्रंथ में महत्वपूर्ण वक्तव्य है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि परमेश्वर ने इब्राहीम को वचन दिया था कि उसे अनेक जातियों का पिता बनाएंगे।