उत्पत्ति 18:5
“फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊँ, और उससे आप अपने-अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात् आगे बढ़ें क्योंकि आप अपने दास के पास इसलिए पधारे हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा तू कहता है वैसा ही कर।””
संदर्भ: उत्पत्ति 18
3“हे प्रभु, यदि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है तो मैं विनती करता हूँ, कि अपने दास के पास से चले न जाना।
4मैं थोड़ा सा जल लाता हूँ और आप अपने पाँव धोकर इस वृक्ष के तले विश्राम करें।
5फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊँ, और उससे आप अपने-अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात् आगे बढ़ें क्योंकि आप अपने दास के पास इसलिए पधारे हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा तू कहता है वैसा ही कर।”
6तब अब्राहम तुरन्त तम्बू में सारा के पास गया और कहा, “तीन सआ मैदा जल्दी से गूँध, और फुलके बना।”
7फिर अब्राहम गाय-बैल के झुण्ड में दौड़ा, और एक कोमल और अच्छा बछड़ा लेकर अपने सेवक को दिया, और उसने जल्दी से उसको पकाया।
उत्पत्ति 18 के बारे में: इसक की जन्म का वादा।

भागवत गाथा के अध्याय 18 का सारांश: भगवान इब्राहीम के पास आते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनकी वृद्धा पत्नी सारा एक पुत्र को जन्म देगी। इब्राहीम हंसते हैं, परंतु सारा गर्भवती हो जाती है और उसे यित्सहक नामक पुत्र की प्रसूति होती है।
व्याख्या
उससे पहले उन तीन आदमियों की यात्रा के बारे में उस यहूदी आदमी इब्राहीम और सारे से बातचीत है जिन्हें बाद में परमेश्वर के दूतों के रूप में पहचाना जाता है और यह बताने के लिए भेजा गया है कि इब्राहीम और सारे का एक पुत्र होगा। यह यहूदी धर्मग्रंथ में महत्वपूर्ण वक्तव्य है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि परमेश्वर ने इब्राहीम को वचन दिया था कि उसे अनेक जातियों का पिता बनाएंगे।