उत्पत्ति 3:9

“तब यहोवा परमेश्‍वर ने पुकारकर आदम से पूछा, “तू कहाँ है?””
— उत्पत्ति 3:9 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: उत्पत्ति 3

7तब उन दोनों की आँखें खुल गईं, और उनको मालूम हुआ कि वे नंगे हैं; इसलिए उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़-जोड़कर लंगोट बना लिये।

8तब यहोवा परमेश्‍वर, जो दिन के ठंडे समय वाटिका में फिरता था, उसका शब्द उनको सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्‍नी वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्‍वर से छिप गए।

9तब यहोवा परमेश्‍वर ने पुकारकर आदम से पूछा, “तू कहाँ है?”

10उसने कहा, “मैं तेरा शब्द वाटिका में सुनकर डर गया, क्योंकि मैं नंगा था; इसलिए छिप गया।”

11यहोवा परमेश्‍वर ने कहा, “किसने तुझे बताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैंने तुझे मना किया था, क्या तूने उसका फल खाया है?”

उत्पत्ति 3 के बारे में: मानव की सृष्टि

उत्पत्ति 3: मानव की सृष्टि

पुरुष और स्त्री भगवान का अज्ञान करते हैं और निषिद्ध पेड़ से खाते हैं। इससे उन्हें अहंकार महसूस होता है और वे शर्मिंदा महसूस करते हैं। भगवान ने उन्हें सजा दी और उन्हें बाग से निकालना पड़ा।

व्याख्या

टिप्पणी: उत्पत्ति 3 वह अध्याय है जिसमें मनुष्य का पतन वर्णित है। इसमें सर्प ईव को प्रलोभित करने लगता है कि उन्हें वह परिज्ञान का फल खाने को ले जाएगा जिसे भगवान ने उन्हें करने से मना कर दिया था। ईव को सर्प की वाद वाणी से भ्रमित किया जाता है कि अगर वह फल खाएगी तो वह भगवान की तरह बन जाएगी। फिर वह आदम को भी फल देती है, जो भी खा लेता है। उनकी अवविनयता के परिणामस्वरूप, भगवान सर्प, पृथ्वी, और आदम और ईव को शापित करते हैं।

मनुष्य का पतन बाइबिल में एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि यह दुनिया में पाप और मौत के आरंभ का सूचक है। यह अनुशासन का परिणामों और भगवान की आज्ञाओं का पालन करने की महत्वता की जानकारी है। यह आज के लिए हमें चेतावनी है कि हमे जगत के वादों से प्रलोभित न होना चाहिए, बल्कि भगवान के प्रति विश्वासयुक्त रहना चाहिए।

उत्पत्ति 3 में लोग