उत्पत्ति 34:8
“हमोर ने उन सबसे कहा, “मेरे पुत्र शेकेम का मन तुम्हारी बेटी पर बहुत लगा है, इसलिए उसे उसकी पत्नी होने के लिये उसको दे दो।”
संदर्भ: उत्पत्ति 34
6तब शेकेम का पिता हमोर निकलकर याकूब से बातचीत करने के लिये उसके पास गया।
7याकूब के पुत्र यह सुनते ही मैदान से बहुत उदास और क्रोधित होकर आए; क्योंकि शेकेम ने याकूब की बेटी के साथ कुकर्म करके इस्राएल के घराने से मूर्खता का ऐसा काम किया था, जिसका करना अनुचित था।
8हमोर ने उन सबसे कहा, “मेरे पुत्र शेकेम का मन तुम्हारी बेटी पर बहुत लगा है, इसलिए उसे उसकी पत्नी होने के लिये उसको दे दो।
9और हमारे साथ ब्याह किया करो; अपनी बेटियाँ हमको दिया करो, और हमारी बेटियों को आप लिया करो।
10और हमारे संग बसे रहो; और यह देश तुम्हारे सामने पड़ा है; इसमें रहकर लेन-देन करो, और इसकी भूमि को अपने लिये ले लो।”
उत्पत्ति 34 के बारे में: दाइना और शेकेमियों।

यह अध्याय दिनाह का बलात्कार किया जाने की कहानी और उसके भाइयों की प्रतिशोध की कहानी कहता है।
व्याख्या
उत्पत्ति 34 एक अध्याय है जो याकूब की बेटी दीना के बलात्कार की कहानी बताता है। दीना ने देश की महिलाओं को देखने के लिए जाने था, और जब वह वहाँ थी, तो हामोर के पुत्र शिकेम ने उसे देखा और ज़बरदस्ती उठा लिया। जब याकूब ने जो हुआ था सुना, तो उसे विवेकसूचक रूप से गुस्सा आया और उन्होंने मांग की कि शिकेम और उसके पिता उसने किया था उसके लिए मुआवज़ा दें। हामोर और शिकेम शर्तों से सहमत हुए, और शिकेम को दीना से शादी करने और देश के लोगों को सुन्नत कराने की एक योजना बनाई गई।
दीना के बलात्कार की कहानी एक दुखद कहानी है, और यह महिलाओं की वंशावली समाज में भावुकता की एक अग्रिम चेतावनी के रूप में कार्य करती है। यह में और पुरूषों के बल का महत्व जाने और महिलाओं का शासन करने और नियंत्रित करने के लिए अपना बल उपयोग करने का चेतावनी कार्य करती है। कहानी यह भी दिखाती है कि गलतियों के लिए न्याय और मुआवज़ा का महत्व कितना होता है। याकूब की मुआवज़ा की मांग एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि गलतियों का सामना किया जाना चाहिए और न्याय किया जाना चाहिए।