उत्पत्ति 39:6
“इसलिए उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहाँ तक छोड़ दिया कि अपने खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। यूसुफ सुन्दर और रूपवान था।”
संदर्भ: उत्पत्ति 39
4तब उसकी अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई, और वह उसकी सेवा टहल करने के लिये नियुक्त किया गया; फिर उसने उसको अपने घर का अधिकारी बनाकर अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया।
5जब से उसने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी।
6इसलिए उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहाँ तक छोड़ दिया कि अपने खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। यूसुफ सुन्दर और रूपवान था।
7इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ, कि उसके स्वामी की पत्नी ने यूसुफ की ओर आँख लगाई और कहा, “मेरे साथ सो।”
8पर उसने अस्वीकार करते हुए अपने स्वामी की पत्नी से कहा, “सुन, जो कुछ इस घर में है मेरे हाथ में है; उसे मेरा स्वामी कुछ नहीं जानता, और उसने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सौंप दिया है।
उत्पत्ति 39 के बारे में: जोसेफ और पोटीफर की पत्नी

जॉसेफ को पोटीफर के पास बेच दिया जाता है, जो एक मिस्री अफसर है, और उसकी सेवा में सफल होता है। पोटीफर की पत्नी ने गलती से जॉसेफ पर बलात्कार का आरोप लगाया है और उसे कैद में डाल दिया जाता है।
व्याख्या
उत्पत्ति अध्याय 39 यूसुफ की कहानी में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो याकूब के पसंदीदा पुत्र थे। यह यूसुफ के भाइयों द्वारा गुलामी में बेचने और उसे मिस्र ले जाने से शुरू होता है। अपनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद, यूसुफ को अपने स्वामी पोतीफर की दृष्टि में कृपा मिलती है। पोतीफर यूसुफ को अपने घर का प्रभार सौंपते हैं और अपनी संपत्तियों के सभी संपादन का भरोसा करते हैं।
यूसुफ अपनी नई भूमिका में सफल होते हैं और ईश्वर की कृपा से आशीर्वादित होते हैं। हालांकि, उनकी सफलता अस्थायी है जब पोतीफर की पत्नी उन्हें राज़ी करने का प्रयास करती है। यूसुफ उसके अग्रसर करने से इंकार करते हैं और इसके परिणामस्वरूप जेल में डाले जाते हैं। अन्यायपूर्ण जेल में भी होने के बावजूद, यूसुफ ईश्वर विश्वासयोग्य रहते हैं और आखिरकार जेल से रिहा किये जाते हैं।