उत्पत्ति 7:2
“सब जाति के शुद्ध पशुओं में से तो तू सात-सात जोड़े, अर्थात् नर और मादा लेना: पर जो पशु शुद्ध नहीं हैं, उनमें से दो-दो लेना, अर्थात् नर और मादा:”
संदर्भ: उत्पत्ति 7
1तब यहोवा ने नूह से कहा, “तू अपने सारे घराने समेत जहाज में जा; क्योंकि मैंने इस समय के लोगों में से केवल तुझी को अपनी दृष्टि में धर्मी पाया है।
2सब जाति के शुद्ध पशुओं में से तो तू सात-सात जोड़े, अर्थात् नर और मादा लेना: पर जो पशु शुद्ध नहीं हैं, उनमें से दो-दो लेना, अर्थात् नर और मादा:
3और आकाश के पक्षियों में से भी, सात-सात जोड़े, अर्थात् नर और मादा लेना, कि उनका वंश बचकर सारी पृथ्वी के ऊपर बना रहे।
4क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; और जितने प्राणी मैंने बनाये हैं उन सबको भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”
उत्पत्ति 7 के बारे में: महाप्रलय

भगवान ने उस आदमी को बताया जिसे उसने बचाया था कि वह एक-एक प्रकार के प्राणी को जहाज में ले ले, एक पुरुष और एक मादा। उन्हें यह भी बताया कि वे सात-सात प्रकार के पंछी और जिस प्रकार के भोजन की आवश्यकता होगी, उसको भी लेकर जाना।
व्याख्या
टिप्पणी: उत्पत्ति 7 में एक महाप्रलय की कहानी है जिसे भगवान ने भूमि को अपनी दुष्टता से शुद्ध करने के लिए भेजा था। इस अध्याय में, भगवान नूह से नौका बनाने के लिए निर्देशित करते हैं और उसके साथ नौहे में प्रत्येक प्रकार के दो-दो प्राणियों को लेने के लिए कहते हैं। भगवान नूह से पुण्य प्राणी और पंछी के सात जोड़े भी लेने के लिए कहते हैं। यह इसलिए है कि प्रलय के बाद बलिदान के लिए प्राणियों का उपयोग किया जा सके।
उन्होंने फिर नूह को बताया कि वह एक महाप्रलय भेजेंगे जो पूरे पृथ्वी को ढक देगा और सभी जीवनत्तुओं को नष्ट कर देगा। नूह और उसके परिवार को नौके में प्रवेश करने का आदेश होता है और सभी प्राणियों को साथ लेने का है। भगवान नूह से भोजन भी लेने के लिए कहते हैं।