उत्पत्ति 7:6

“नूह की आयु छः सौ वर्ष की थी, जब जल-प्रलय पृथ्वी पर आया।”
— उत्पत्ति 7:6 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: उत्पत्ति 7

4क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; और जितने प्राणी मैंने बनाये हैं उन सबको भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”

5यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।

6नूह की आयु छः सौ वर्ष की थी, जब जल-प्रलय पृथ्वी पर आया।

7नूह अपने पुत्रों, पत्‍नी और बहुओं समेत, जल-प्रलय से बचने के लिये जहाज में गया।

8शुद्ध, और अशुद्ध दोनों प्रकार के पशुओं में से, पक्षियों,

उत्पत्ति 7 के बारे में: महाप्रलय

उत्पत्ति 7: महाप्रलय

भगवान ने उस आदमी को बताया जिसे उसने बचाया था कि वह एक-एक प्रकार के प्राणी को जहाज में ले ले, एक पुरुष और एक मादा। उन्हें यह भी बताया कि वे सात-सात प्रकार के पंछी और जिस प्रकार के भोजन की आवश्यकता होगी, उसको भी लेकर जाना।

व्याख्या

टिप्पणी: उत्पत्ति 7 में एक महाप्रलय की कहानी है जिसे भगवान ने भूमि को अपनी दुष्टता से शुद्ध करने के लिए भेजा था। इस अध्याय में, भगवान नूह से नौका बनाने के लिए निर्देशित करते हैं और उसके साथ नौहे में प्रत्येक प्रकार के दो-दो प्राणियों को लेने के लिए कहते हैं। भगवान नूह से पुण्य प्राणी और पंछी के सात जोड़े भी लेने के लिए कहते हैं। यह इसलिए है कि प्रलय के बाद बलिदान के लिए प्राणियों का उपयोग किया जा सके।

उन्होंने फिर नूह को बताया कि वह एक महाप्रलय भेजेंगे जो पूरे पृथ्वी को ढक देगा और सभी जीवनत्तुओं को नष्ट कर देगा। नूह और उसके परिवार को नौके में प्रवेश करने का आदेश होता है और सभी प्राणियों को साथ लेने का है। भगवान नूह से भोजन भी लेने के लिए कहते हैं।

उत्पत्ति 7 में लोग