उत्पत्ति 9:4
“पर माँस को प्राण समेत अर्थात् लहू समेत तुम न खाना।”
संदर्भ: उत्पत्ति 9
2तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा वे सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं।
3सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे; जैसे तुमको हरे-हरे छोटे पेड़ दिए थे, वैसे ही तुम्हें सब कुछ देता हूँ।
4पर माँस को प्राण समेत अर्थात् लहू समेत तुम न खाना।
5और निश्चय मैं तुम्हारा लहू अर्थात् प्राण का बदला लूँगा: सब पशुओं, और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूँगा; मनुष्य के प्राण का बदला मैं एक-एक के भाई बन्धु से लूँगा।
6जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा उसका लहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है।
उत्पत्ति 9 के बारे में: नूह के साथ स्वर्गीय प्रतिज्ञा।

उस आदमी और उसके परिवार को भगवान ने आशीर्वाद दिया और उनसे कहा कि वे फलदार हों और वृद्धि करें। उन्हें मांस भी खाने की अनुमति दी, लेकिन उन्हें पहले उससे रक्त निकालना था। भगवान ने भी एक वादा किया कि कसी बाढ़ से उसने फिर से सम्पूर्ण जीवन को नष्ट नहीं करेगा।
व्याख्या
उपदेश:
उत्पत्ति 9 में नूह और उसके वंशियों के साथ ईश्वर की संधि की कहानी है। महाप्रालय के बाद, ईश्वर वादा करते हैं कि वह दोबारा पूरी पृथ्वी को बाढ़ से नष्ट नहीं करेगा। उन्होंने नूह और उसके वंशियों को जानवरों पर शासन करने और उन्हें भोजन के लिए उपयोग करने की अधिकार दिया। यह पहली बार है जब बाइबिल में ईश्वर मनुष्यों को जानवरों पर अधिकार देते हैं।