मार्क ग्रंथ 6:50

“क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे। पर उसने तुरन्त उनसे बातें की और कहा, “धैर्य रखो : मैं हूँ; डरो मत।””
— मार्क ग्रंथ 6:50 (Eliot Indian Bible)

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संदर्भ: मार्क ग्रंथ 6

48और जब उसने देखा, कि वे खेते-खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरुद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उनके पास आया; और उनसे आगे निकल जाना चाहता था।

49परन्तु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्ला उठे,

50क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे। पर उसने तुरन्त उनसे बातें की और कहा, “धैर्य रखो : मैं हूँ; डरो मत।”

51तब वह उनके पास नाव पर आया, और हवा थम गई: वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।

52क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में न समझे थे परन्तु उनके मन कठोर हो गए थे।

मार्क ग्रंथ 6 के बारे में: यीशु द्वादश प्रेरितों को भेजते हैं

मार्क ग्रंथ 6: यीशु द्वादश प्रेरितों को भेजते हैं

विशुद्ध योहान के इंजील के छहवें अध्याय में यीशु अपने लोगों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है, बारह अपोस्तलों को भेजता है, और अधिक चमत्कार करता है।

व्याख्या

मार्क 6 एक अध्याय है जो यीशु की सेवा और लोगों की उसके उपदेशों के प्रति प्रतिक्रिया पर केंद्रित है। इस अध्याय में, यीशु अपने गाँव नाजरेथ लौटते हैं और वहाँ के लोगों द्वारा अस्वीकृत किए जाते हैं। फिर उन्होंने बारह शिष्यों को प्रेम सुनाने और चमत्कार करने के लिए भेजा। उनके प्रयास में सफल होते हैं, लेकिन जब वे वापस लौटते हैं, तो यीशु को लोगों की श्रद्धा की कमी से चिंता होती है। उसके बाद उन्होंने बेथसैडा और खोराजिन के पास जाकर लोगों को और श्रेष्ठता की प्राप्ति फिर और चमत्कार किए और उन्हें सिखाते हैं।

अध्याय यीशु ने पाँच लोगों को पाँच रोटियों और दो मछलियों से पोषण किया महसूस होता है। यह चमत्कार भगवान की प्रावधानशीलता और उसकी शक्ति की एक संकेत है। यह यीशु की दया और कृपा की एक याद भी है। वह लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्पर है, यहाँ तक कि जब वे उसमें विश्वास नहीं करते।

मार्क ग्रंथ 6 में लोग