प्रकटिकरण 21:18
“उसकी शहरपनाह यशब की बनी थी, और नगर ऐसे शुद्ध सोने का था, जो स्वच्छ काँच के समान हो।”
संदर्भ: प्रकटिकरण 21
16वह नगर वर्गाकार बसा हुआ था और उसकी लम्बाई, चौड़ाई के बराबर थी, और उसने उस गज से नगर को नापा, तो साढ़े सात सौ कोस का निकला: उसकी लम्बाई, और चौड़ाई, और ऊँचाई बराबर थी।
17और उसने उसकी शहरपनाह को मनुष्य के, अर्थात् स्वर्गदूत के नाप से नापा, तो एक सौ चौवालीस हाथ निकली।
18उसकी शहरपनाह यशब की बनी थी, और नगर ऐसे शुद्ध सोने का था, जो स्वच्छ काँच के समान हो।
19उस नगर की नींवें हर प्रकार के बहुमूल्य पत्थरों से संवारी हुई थी, पहली नींव यशब की, दूसरी नीलमणि की, तीसरी लालड़ी की, चौथी मरकत की,
20पाँचवी गोमेदक की, छठवीं माणिक्य की, सातवीं पीतमणि की, आठवीं पेरोज की, नौवीं पुखराज की, दसवीं लहसनिए की, ग्यारहवीं धूम्रकान्त की, बारहवीं याकूत की थी।
प्रकटिकरण 21 के बारे में: नया स्वर्ग और नया पृथ्वी

यह अध्याय नए आसमान और नई पृथ्वी के सृष्टि का वर्णन करता है, जहाँ परमेश्वर के लोग उसके साथ पूर्ण सांगत्य में रहेंगे। यह अध्याय परमेश्वर के लोगों के पूरी प्रत्यार्थ और मोचन को और सभी पीड़ा और पाप के अंत को जोर देता है।
व्याख्या
प्रकटिकरण 21 आशा और वादे का एक अध्याय है। यह नए आकाश और नई पृथ्वी की एक दृश्य है, जहां भगवान अपने लोगों के साथ वास करेंगे। यह अध्याय यह एक अनुस्मारक है कि भगवान विश्वासप्रद हैं और अपने वादों को निभाएंगे।
अध्याय नई यरूशलेम का वर्णन करके शुरू होता है, जिसे सोने और प्रिय रत्नों का शहर बताया गया है। यह एक प्रतीक है नई दुनिया के सौंदर्य और पूर्णता का जो भगवान सृष्टि करेंगे। यह शहर एक दीवार के साथ वर्णित भी है जिसमें बारह गेट है, प्रत्येक गेट एक देवदूत द्वारा रक्षित किया जाता है। यह एक अनुस्मारक है कि भगवान अपने लोगों की सुरक्षा करेंगे और उन्हें सुरक्षित रखेंगे।